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सऊदी का पलटवार! इराक में ईरान समर्थित ठिकानों पर एयरस्ट्राइक, पश्चिम एशिया में फिर बढ़ा युद्ध का खतरा

July 29, 2026

तेहरान। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गया है। सऊदी अरब (Saudi Arabia) ने अपने तेल प्रतिष्ठानों पर हुए ड्रोन हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए इराक में ईरान (Iran in Iraq) समर्थित गुटों के ठिकानों पर हवाई हमला किया है। इस अभियान में अमेरिकी सेना ने भी सहयोग किया। रियाद का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मरक्षा के अधिकार के तहत की गई है। घटनाक्रम के बाद पूरे क्षेत्र में संघर्ष और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।

तेल ठिकानों पर ड्रोन हमलों के बाद जवाबी कार्रवाई

सऊदी अरब के अनुसार, पिछले 72 घंटों के दौरान उसके तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर 30 से अधिक ड्रोन हमले करने की कोशिश की गई। इसके बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) और सऊदी वायुसेना ने संयुक्त अभियान चलाते हुए इराक में मौजूद ईरान समर्थित संगठनों के हथियार भंडार और लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया।

सऊदी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह सैन्य कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद-51 के तहत आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए की गई है।


  • रियाद ने ईरान को दी सख्त चेतावनी

    एयरस्ट्राइक के बाद सऊदी अरब ने ईरान को स्पष्ट संदेश दिया कि वह क्षेत्र में तनाव बढ़ाने का पक्षधर नहीं है, लेकिन अपनी सुरक्षा और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देगा। सऊदी रक्षा मंत्री ने कहा कि यदि भविष्य में तेल ठिकानों को निशाना बनाया गया तो जवाब पहले से अधिक कड़ा होगा।

    बताया जा रहा है कि फरवरी से ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव के बाद यह सऊदी अरब और ईरान के बीच सबसे गंभीर टकराव माना जा रहा है।

    अमेरिका ने भी बढ़ाया दबाव

    उधर, अमेरिका ने भी ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और उससे जुड़े गुटों को हमले रोकने की चेतावनी दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि फिलहाल सैन्य कार्रवाई रोककर कूटनीतिक प्रयासों को मौका दिया जा रहा है, लेकिन यदि बातचीत विफल रही तो अमेरिका दोबारा कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

    ट्रंप ने ईरान के महत्वपूर्ण ऊर्जा और बुनियादी ढांचे से जुड़े ठिकानों को लेकर भी कड़ी चेतावनी दोहराई।

    क्या कूटनीति से टलेगा संकट?

    क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, ईरान और ओमान के बीच जारी वार्ता में कुछ सकारात्मक संकेत जरूर मिले हैं, लेकिन अभी किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बन सकी है।

    ओमान के विदेश मंत्री बदर अल-बुसैदी ने हाल ही में ईरान, कतर, सऊदी अरब, कुवैत और मिस्र के विदेश मंत्रियों से बातचीत की। क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, एक प्रस्ताव पर चर्चा चल रही है जिसके तहत ईरान, ओमान और अन्य क्षेत्रीय देशों को समुद्री सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा संबंधित सेवाओं के बदले विशेष सेवा शुल्क लेने की अनुमति दी जा सकती है।

    सूत्रों का कहना है कि इस व्यवस्था को मलक्का जलडमरूमध्य के मॉडल की तर्ज पर विकसित करने पर विचार किया जा रहा है, जहां सामान्य ट्रांजिट शुल्क के बजाय विशेष सेवाओं के लिए जहाजों से शुल्क लिया जाता है।

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