
नई दिल्ली। यमन (Yemen) के हूती विद्रोहियों (Houthi rebels) के सऊदी अरब (Saudi Arabia) पर बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों (Missile and drone Attacks) के बीच तुर्की ने रियाद के समर्थन में खुलकर सामने आने के संकेत दिए हैं। तुर्की के विदेश मंत्री हकन फिदान ने कहा है कि मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत सऊदी अरब को सैन्य जरूरत पड़ने पर, खासकर तकनीकी मामलों में, मदद देने में अंकारा को कोई हिचक नहीं होगी।
फिदान ने शनिवार को कहा कि सऊदी अरब की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता पर गंभीर हमले हो रहे हैं और तुर्की इस मुश्किल दौर में रियाद के साथ मजबूती से खड़ा है। उन्होंने कहा कि तीनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते में गठबंधन की व्यवस्था है। ऐसे में अगर सऊदी अरब को किसी तरह की सैन्य सहायता की जरूरत होती है तो तुर्की उसे पूरा करने की कोशिश करेगा।
क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता
तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने अगस्त में मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के मुताबिक तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होता है तो उसे सभी पर हमला माना जाएगा। समझौते का उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा और रक्षा सहयोग को मजबूत करना है।
हकन फिदान ने कहा कि सऊदी अरब पर लगातार हो रहे हूती हमलों के बीच यह समझौता रियाद के प्रति तुर्की की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सऊदी अरब को अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में खींचा जाना स्वीकार्य नहीं है। उनके मुताबिक रियाद की इस युद्ध में शामिल होने की इच्छा नहीं है।
फिदान ने संघर्ष को खत्म करने के लिए विभिन्न पक्षों के सामने नए प्रस्ताव रखे जाने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि कई पहल की गई हैं, लेकिन उनका सफल होना संबंधित पक्षों के उन्हें स्वीकार करने पर निर्भर करेगा।
पाकिस्तान का रुख क्या है?
मक्का समझौते में शामिल पाकिस्तान ने कहा है कि सऊदी अरब पर हूती हमलों के जवाब में इस समझौते के तहत तत्काल सैन्य कार्रवाई को लेकर इस्लामाबाद में कोई बातचीत नहीं हुई है। हालांकि पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि जरूरत पड़ने पर वह अपनी प्रतिबद्धता निभाएगा।
इससे पहले पाकिस्तान की ओर से ईरान से हूती हमलों को नियंत्रित करने की अपील भी सामने आई है। ऐसे में समझौते के बावजूद पाकिस्तान की तत्काल सैन्य भूमिका को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
रियाद पर मिसाइल-ड्रोन हमले का दावा
इस बीच शनिवार को हूतियों ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद में संवेदनशील ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया। यह दावा रियाद के मुख्य एयरपोर्ट के आसपास आग और धुएं का गुबार दिखाई देने के कुछ घंटे बाद किया गया।
सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने बताया कि रियाद की ओर आ रही एक बैलिस्टिक मिसाइल को एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही रोककर नष्ट कर दिया। सऊदी अधिकारियों ने हमले की आशंका को देखते हुए रातभर लोगों को अलर्ट पर रखा। शनिवार सुबह अधिकारियों ने स्थिति सामान्य होने की जानकारी दी।
हूतियों के हमलों ने सऊदी अरब की सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्र की ऊर्जा और समुद्री आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ाया है। ऐसे माहौल में तुर्की का सैन्य और तकनीकी सहयोग का संकेत मक्का रक्षा समझौते की पहली बड़ी परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, फिदान की घोषणा अभी सैन्य तैनाती या सीधे युद्ध में तुर्की की भागीदारी का ऐलान नहीं है; उन्होंने मुख्य रूप से संभावित सैन्य जरूरतों को पूरा करने की तत्परता जताई है।
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