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मानहानि केस में शिवराज समेत तीन नेता दोषमुक्त, विवेक तन्खा ने वापस लिया मुकदमा

March 13, 2026

जबलपुर। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chouhan) को मानहानि के एक मामले में बड़ी राहत मिली है। जबलपुर की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने राज्यसभा सांसद विवेक तन्‍खा (Vivek Tankha) द्वारा दायर मानहानि प्रकरण में शिवराज सिंह चौहान, खजुराहो सांसद वी शर्मा (V. D. Sharma) और भाजपा विधायक भूपेन्‍द्र सिंह (Bhupendra Singh) को दोषमुक्त कर दिया है। यह फैसला दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति बनने के बाद आया।

जबलपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट के विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट डी.पी. सूत्रकर ने परिवादी विवेक तन्खा की ओर से दायर मुकदमा वापस लेने के आवेदन को स्वीकार करते हुए तीनों नेताओं को मामले से मुक्त कर दिया। बताया जा रहा है कि अंतिम निर्णय से पहले ही तन्खा ने अदालत में मानहानि का प्रकरण वापस लेने का निवेदन कर दिया था।


  • पंचायत चुनाव के बयान से शुरू हुआ विवाद

    यह मामला वर्ष 2021 में हुए Madhya Pradesh Panchayat Elections 2021 के दौरान ओबीसी आरक्षण से जुड़े विवाद से शुरू हुआ था। उस समय विवेक तन्खा सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में पैरवी कर रहे थे। इसी मुद्दे पर तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा दिए गए कुछ बयानों को तन्खा ने अपनी छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया था।

    तन्खा का आरोप था कि पंचायत चुनावों पर रोक के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ गलत तरीके से बयान दिए गए। इससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची और उन्हें सार्वजनिक आलोचना का सामना करना पड़ा।

    10 करोड़ की मानहानि का दावा

    इसी आधार पर विवेक तन्खा ने शिवराज सिंह चौहान, वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह के खिलाफ सिविल और आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया था। सिविल केस में उन्होंने 10 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की थी, जबकि आपराधिक मामले में आईपीसी की धारा 500 के तहत कार्रवाई की मांग की गई थी।

    मामला जबलपुर की एमपी-एमएलए कोर्ट में विचाराधीन था। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान और अन्य नेताओं ने प्रकरण निरस्त कराने के लिए पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

    सुप्रीम कोर्ट के सुझाव के बाद सुलझा विवाद

    जब मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो वहां से सौहार्दपूर्ण समाधान तलाशने का सुझाव दिया गया। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हुई। बताया जाता है कि संसद में मुलाकात और चर्चा के बाद विवेक तन्खा ने चुनावी बयानों को लेकर दायर सिविल और आपराधिक मानहानि मामलों को वापस लेने का निर्णय लिया।

    समझौते को रिकॉर्ड में लेते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने भी प्रकरण निरस्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद जबलपुर की विशेष अदालत ने तन्खा के आवेदन को स्वीकार करते हुए तीनों नेताओं को मानहानि केस से दोषमुक्त कर दिया।

    परिवादी पक्ष ने दी जानकारी

    परिवादी पक्ष के अधिवक्ता श्यामसुंदर यादव के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के आग्रह पर विवेक तन्खा ने मानहानि का दावा वापस लेने का निर्णय लिया। आपसी सहमति बनने के बाद अदालत ने मामले का निपटारा करते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

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