
नई दिल्ली। आज 15 जून 2026, सोमवार के दिन साल की पहली सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya 2026) का पावन पर्व देशभर में धूमधाम से मनाया जा रहा है. सनातन धर्म (Sanatan Dharma) में अमावस्या ( Amavasya) तिथि का अपना विशेष महत्व है, परंतु जब यह सोमवार के दिन पड़ती है, तो इसका आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है. सोमवती अमावस्या को भगवान शिव (Lord Shiva) और माता पार्वती (Mother Parvati) की असीम कृपा का सबसे पाने शुभ दिन माना जाता है.
सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित होता है. जब चंद्रमा का प्रभाव कम होता है (अमावस्या), तब मन की शांति और चंचलता को वश में करने के लिए शिव साधना अत्यंत प्रभावी मानी जाती है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से वैवाहिक सुख में वृद्धि होती है, परिवार में खुशहाली आती है और पितरों का आशीर्वाद मिलता है.
आज का शुभ मुहूर्त
– पूजा और दान-पुण्य के लिए आज का दिन अत्यंत श्रेष्ठ है:
– ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:02 से 04:42 बजे तक.
– अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11:54 से 12:49 बजे तक.
– गोधुली बेला: शाम 07:17 से 07:37 बजे तक.
पूजा विधि
– स्नान और संकल्प: आज के दिन पवित्र नदी या सरोवर में स्नान का विशेष महत्व है. यदि घर पर हैं, तो स्नान के जल में थोड़ा गंगाजल मिलाकर पवित्रता का भाव रखें. स्वच्छ वस्त्र धारण करे, दिन भर सकारात्मक रहने का संकल्प लें.
– शिव पूजन: घर के पूजा स्थल या किसी निकटतम शिवालय में जाकर शिवलिंग का गंगाजल, गाय के कच्चे दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें.
– अर्पण: भगवान शिव को बेलपत्र, शमी के पत्ते, सफेद चंदन, धतूरा और अक्षत (बिना टूटे चावल) अर्पित करें. माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री भेंट करें.
– मंत्र जाप: ॐ नमः शिवाय मंत्र का यथासंभव जाप करें. यह मन को एकाग्र करने और पितृ दोषों से मुक्ति दिलाने में सहायक है.
दान का महत्व
सोमवती अमावस्या पर दान को अक्षय पुण्य देने वाला माना गया है. शास्त्रों के अनुसार, आज के दिन अपनी क्षमतानुसार वस्तुओं का दान अवश्य करना चाहिए.
– अन्नदान: चावल, दाल, आटा, घी और गुड़ का दान जरूरतमंदों को करें. इसे सबसे श्रेष्ठ दान कहा गया है.
– वस्त्र दान: किसी निर्धन को नए वस्त्र या मौसमी फल दान करें.
– पितृ तर्पण: आज के दिन पितरों के निमित्त धूप-दीप दिखाएं और जल तर्पण करें. ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होकर कुल की उन्नति का आशीर्वाद देते हैं.
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