मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत (Maharashtra Politics) में एक बार फिर शिवसेना (UBT) को लेकर हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ शिवसेना की ओर से दावा किया गया है कि शिवसेना (UBT) के 14 विधायक नवरात्रि से पहले पाला बदल सकते हैं। इस दावे के बाद उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को बांद्रा स्थित अपने आवास ‘मातोश्री’ पर आपात बैठक बुलाई।
सूत्रों के मुताबिक, दोपहर करीब 12 बजे शुरू हुई इस बैठक में शिवसेना (यूबीटी) के विधायकों और पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की गई। हालांकि, ठाकरे गुट के विधायक कैलाश पाटिल ने पार्टी में किसी तरह की टूट की संभावना से इनकार किया है।
क्या है ‘ऑपरेशन टाइगर पार्ट-2’?
शिवसेना के सूत्रों का दावा है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दिल्ली रवाना होने से पहले शिवसेना (यूबीटी) के कुल 20 विधायकों में से 14 को अपने पाले में लाने की जिम्मेदारी कोंकण, मराठवाड़ा और पश्चिमी महाराष्ट्र के तीन मंत्रियों को सौंपी है।
सूत्र इसे ‘ऑपरेशन टाइगर पार्ट-2’ बता रहे हैं। अगर 14 विधायक वास्तव में उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ते हैं तो विधानसभा में शिवसेना (यूबीटी) की मौजूदा ताकत पर बड़ा असर पड़ेगा। हालिया विधानसभा चुनाव में ठाकरे गुट ने 20 सीटें जीती थीं। हालांकि, अभी तक 14 विधायकों के पाला बदलने को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कैलाश पाटिल ने दावे को बताया राजनीतिक हथकंडा
शिवसेना (यूबीटी) विधायक कैलाश पाटिल ने पार्टी में टूट की खबरों को खारिज किया है। उन्होंने ‘ऑपरेशन टाइगर’ को बार-बार दोहराया जाने वाला राजनीतिक हथकंडा बताते हुए कहा कि कोई भी विधायक पार्टी छोड़ने की तैयारी में नहीं है।
पाटिल ने राज्य सरकार पर भी निशाना साधा। उनका आरोप है कि सरकार किसानों की समस्याओं, बेरोजगारी, हालिया परीक्षा पत्र लीक और मराठा आरक्षण आंदोलन जैसे मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय दलबदल की राजनीति में लगी है।
किन मंत्रियों को दी गई जिम्मेदारी?
शिंदे गुट के सूत्रों के मुताबिक, कोंकण क्षेत्र से उदय सामंत, भरत गोगावले और योगेश कदम मंत्री हैं। मराठवाड़ा से संजय शिरसाट, जबकि पश्चिमी महाराष्ट्र से शंभूराज देसाई और प्रकाश आबिटकर मंत्री हैं।
हालांकि, इनमें से किन तीन मंत्रियों को कथित तौर पर विधायकों को साथ लाने की जिम्मेदारी दी गई है, इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
दिल्ली जा रहे हैं एकनाथ शिंदे
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मंगलवार को नई दिल्ली के लिए रवाना हुए। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात हो सकती है।
इसके अलावा शिंदे सुप्रीम कोर्ट में शिवसेना के चुनाव चिह्न से जुड़े मामले की पैरवी कर रहे अपनी पार्टी के वकीलों से भी मुलाकात कर सकते हैं।
शिवसेना के चुनाव चिह्न को लेकर विवाद उस घटनाक्रम के बाद और महत्वपूर्ण हो गया था, जब ‘ऑपरेशन टाइगर’ के पिछले चरण में शिवसेना (यूबीटी) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने का दावा किया गया था।
6 विधायकों ने मांगे अच्छे मंत्रालय?
सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि शिवसेना (यूबीटी) छोड़ने के इच्छुक बताए जा रहे 14 विधायकों में से छह ने फडणवीस सरकार में महत्वपूर्ण मंत्रालयों की मांग की है और इसे लेकर बातचीत अंतिम दौर में है।
हालांकि, इस दावे की भी अभी संबंधित विधायकों या सरकार की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
कैबिनेट बैठक में नहीं पहुंचे शिंदे
इसी बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई महाराष्ट्र कैबिनेट की बैठक में एकनाथ शिंदे के शामिल नहीं होने से भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गईं। शिवसेना के अन्य मंत्रियों ने बैठक में हिस्सा लिया।
शिंदे की ओर से कैबिनेट बैठक में शामिल नहीं होने की कोई आधिकारिक वजह नहीं बताई गई है और उनके कार्यालय की ओर से भी इस संबंध में कोई पुष्टि नहीं हुई।
सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट बैठक के दौरान शिंदे अपने ठाणे स्थित आवास पर थे और वहां से दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे थे।
BJP-शिंदे गुट में मतभेद की चर्चा
शिंदे की कैबिनेट बैठक से गैरमौजूदगी ऐसे समय हुई है, जब भाजपा और शिंदे गुट के बीच कई मुद्दों पर मतभेद की चर्चाएं सामने आती रही हैं। इनमें मुंबई के सहकारी नेटवर्क पर नियंत्रण और राज्य संचालित निगमों में पदों के बंटवारे जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं।
फिलहाल उद्धव ठाकरे गुट में संभावित टूट को लेकर दावे और प्रतिदावे सामने आ रहे हैं। मातोश्री पर हुई आपात बैठक के बाद राजनीतिक निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में शिवसेना (यूबीटी) के विधायकों में कोई बड़ा फेरबदल होता है या ‘ऑपरेशन टाइगर पार्ट-2’ का दावा सिर्फ राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति साबित होता है।
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