
नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा कि पावर टू एंपावर करने वाला भाव (Spirit of ‘Power to Empower’) सिर्फ उपदेश देने के लिए नहीं है (Is not merely for Preaching) ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में लोगों को संबोधित करते हुए कहा, प्रधानमंत्री ने कहा, “पावर टू एंपावर करने वाला यह जो मानवीय भाव है, यह सिर्फ दूसरों को उपदेश देने के लिए नहीं है। यह हजारों वर्षों की परंपरा ने हमें सिखाया है। भारत में हमने इसे अपनी गवर्नेंस में, अपनी कार्य संस्कृति में लागू करके दिखाया है।” उन्होंने कहा कि दोस्तों, यह विचार भारत के लिए नया नहीं है। हमारी एक कहावत है कि “विद्या विवादाय, धनं मदाय, शक्तिः परेषां परिपीडनाय खलस्य। साधोर्विपरीतमेतत् ज्ञानाय, दानाय च रक्षणाय॥” इसका सार यह है कि ज्ञान, धन और शक्ति, चाहे ये किसी के भी पास हों, इस आधार पर आंका जाना चाहिए कि वे इनका इस्तेमाल कैसे करते हैं।
पीएम ने कहा, “तकनीक का इस्तेमाल करते हुए हमने लाभार्थियों के बैंक अकाउंट तक सीधे सरकारी मदद पहुंचाने की व्यवस्था बनाई है। इससे भ्रष्टाचार कम हुआ है, देश के नागरिक की सुविधा बढ़ी है और सरकार और नागरिक के बीच सीधा रास्ता बना है।” उन्होंने कहा, “दुनिया में पावर की इस भागदौड़ में भारत एक अलग मिजाज लेकर चल रहा है और इसका गवाह यह दशक भी है। 21वीं सदी का यह दशक अभूतपूर्व ग्लोबल चुनौतियां लेकर आया है। हमने महामारी देखी, फिर दुनिया के अलग-अलग देशों में युद्ध छिड़ गया। जैसे इतना ही काफी नहीं था, ट्रेड हो, क्रिटिकल मिनरल्स हो, एनर्जी सप्लाई हो, इनमें भी अड़चनें आ रही हैं। दुनिया एक संकट से बाहर निकलने का रास्ता तलाशती है, तब तक एक नया संकट आ जाता है।”
पीएम ने कहा, “जिन चीजों ने कभी दुनिया को जोड़ा था, वही आज हथियार बन रही हैं। सप्लाई चेन हो, एनर्जी हो, मिनरल्स हो, पेमेंट हो या तकनीक, ये दबाव और दबदबे का माध्यम बन रही हैं।” उन्होंने कहा, “2014 में भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता लगभग 75 गीगावाट थी। आज यह लगभग 300 गीगावाट तक पहुंच गया है। इसका मतलब है कि हमने लगभग चार गुना क्षमता जोड़ी है। साथियों, भारत में हो रहा ये ऊर्जा परिवर्तन नए अवसर भी पैदा कर रहा है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, द बिग कैट एलायंस, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा, आईएमईसी, मिशन लाइफ और पर्यावरण के लिए जीवनशैली दी है। दूसरे शब्दों में, भारत ने ऐसी पहल की है जिससे हर किसी और जीवन के हर स्वरूप को फायदा हो।” उन्होंने कहा, “आज, हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से ज्यादा है। दोस्तों, हमारा बैंकिंग सिस्टम कई देशों के मुकाबले सबसे मजबूत स्थितियों में से एक है। इसी मजबूती का नतीजा है कि भारत की सॉवरेन रेटिंग्स को अपग्रेड किया जा रहा है। आज, भारत का आत्मविश्वास अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर है। हम स्पष्ट नीतिगत दिशा के साथ सुधार कर रहे हैं। जीएसटी के जरिए, हमने टैक्स के जटिल जाल को एक राष्ट्रीय बाजार में बदल दिया है।”
उन्होंने कहा, “हमने दिवालियापन कानून बनाया है। 29 लेबर कोड्स को अब चार सरल कोड्स में मिला दिया गया है। कारोबार से जुड़ी सैकड़ों छोटी-मोटी समस्याओं को आसान बनाया गया है, और हम यहीं नहीं रुके हैं। भारत की सुधारों की गाड़ी तेज़ी से आगे बढ़ रही है। हमारे लिए, सुधार कोई मजबूरी नहीं हैं बल्कि सुधार हमारा संकल्प हैं।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा, “हर बार ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम दुनिया के बेहतरीन माइंड्स को एक साथ लाता है। यहां इकोनॉमी पर चर्चा होती है। टेक्नोलॉजी, एनर्जी और ग्लोबल अफेयर्स पर विमर्श होता है। इस बार पहली बार यह आयोजन भारत में हो रहा है। मैं मिस्टर ब्लूमबर्ग और उनकी पूरी टीम को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आपने सही समय पर सही जगह चुनी है।”
पीएम मोदी ने कहा, “इस साल ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम की थीम दुनिया में उभरती नई पावर पर केंद्रित है। हर युग में पावर के अपने स्रोत और अपनी परिभाषा रही है, लेकिन 21वीं सदी में, खासकर इस तीसरे दशक में, बड़ा बदलाव हो रहा है। आज, डेटा ही शक्ति है, ज्ञान ही शक्ति है, इनोवेशन ही शक्ति है। असली सवाल यह नहीं है कि पावर किसके पास है, बल्कि सवाल यह है कि इसका इस्तेमाल कैसे हो रहा है। क्या टेक्नोलॉजी कुछ लोगों को आगे बढ़ाएगी या करोड़ों लोगों के लिए नए अवसर बनाएगी? क्या नॉलेज केवल कुछ लोगों की ताकत बनी रहेगी या सबकी क्षमता बढ़ाएगी? यहीं से एक नया विचार जन्म लेता है और यह विचार है- पावर टू एंपावर। “
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved