
नई दिल्ली। अमिताभ बच्चन(Amitabh Bachchan’s) के लोकप्रिय क्विज शो कौन बनेगा करोड़पति (Kaun Banega Crorepati)18 में इस बार हॉट सीट (Hot Seat)पर पहुंचे डॉ. गणेश बरैया ने अपने खेल से ज्यादा अपनी जिंदगी की कहानी से लोगों का ध्यान खींचा। गुजरात के भावनगर जिले के गोरखी गांव से आने वाले गणेश का कद भले ही करीब 3 फीट है लेकिन उनके हौसले और संघर्ष की कहानी किसी बड़े प्रेरणादायक किरदार से कम नहीं है। KBC 18 के हालिया एपिसोड में उन्होंने अपने बचपन से लेकर डॉक्टर बनने तक के सफर के कई ऐसे किस्से साझा किए जिन्हें सुनकर दर्शक भावुक हो गए।
गणेश बरैया जन्म से ड्वार्फिज्म की चुनौती से जूझते रहे हैं और उनके शरीर का 72 प्रतिशत हिस्सा लोकोमोटर डिसेबिलिटी से प्रभावित है। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई में कभी अपनी शारीरिक स्थिति को बाधा नहीं बनने दिया। उन्होंने 12वीं कक्षा में 87 प्रतिशत अंक हासिल किए और साल 2018 में NEET परीक्षा भी पास की। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने दिव्यांग कोटे के तहत मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की थी। हालांकि डॉक्टर बनने की उनकी राह इतनी आसान नहीं थी। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से उनकी शारीरिक अक्षमता को लेकर MBBS में प्रवेश पर आपत्ति जताई गई थी।
इसके बाद गणेश के स्कूल प्रिंसिपल डॉ. दलपत कटारिया उनके साथ मजबूती से खड़े हुए। मामला अदालत तक पहुंचा और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट से गणेश के पक्ष में फैसला आया। इसके बाद 2019 में उन्हें भावनगर मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिला और उन्होंने MBBS की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के दौरान भी उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन शिक्षकों और दोस्तों के सहयोग से उन्होंने अपनी मंजिल हासिल की।
गणेश की जिंदगी का सबसे भावुक अध्याय उनके बचपन से जुड़ा है। उन्होंने KBC में बताया कि जब वह छोटे थे तब सर्कस से जुड़े कुछ लोग उनके घर पहुंचे थे। उनके पिता को गणेश को अपने साथ ले जाने के बदले 5 लाख रुपये देने का प्रस्ताव दिया गया था। लेकिन उनके पिता ने पैसों के बजाय बेटे की पढ़ाई और सम्मान को चुना। इस घटना की पुष्टि पहले की रिपोर्टों में भी हुई है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक गणेश करीब 10 साल के थे जब एक सर्कस मंडली ने उन्हें खरीदने के लिए 5 लाख रुपये की पेशकश की थी। उनके पिता ने यह प्रस्ताव ठुकरा दिया और इसके बाद गणेश की सुरक्षा को लेकर और भी सतर्क रहे।
गणेश बताते हैं कि उनकी बहनें उन्हें गोद में उठाकर स्कूल ले जाती थीं और उनके पिता उन्हें कंधे पर बैठाकर पढ़ने भेजते थे। परिवार के इसी भरोसे ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी। आज वही गणेश भावनगर के अस्पताल में डॉक्टर के तौर पर मरीजों की सेवा कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार वह मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम कर चुके हैं और अस्पताल में मरीजों के इलाज से जुड़े काम में सक्रिय रहे हैं।
KBC 18 में गणेश ने फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट चैलेंज जीतकर हॉट सीट तक अपनी जगह बनाई। उन्होंने शुरुआती सवालों का सही जवाब देते हुए 3 लाख रुपये के सवाल तक का सफर तय किया लेकिन उस समय तक उनकी सभी लाइफलाइन खत्म हो चुकी थीं। सवाल का सही जवाब नहीं दे पाने के कारण उनकी जीती हुई रकम घटकर 25 हजार रुपये रह गई और उनकी KBC यात्रा वहीं समाप्त हो गई।
गणेश बरैया की कहानी इस बात की मिसाल है कि किसी इंसान की पहचान उसके कद या शारीरिक स्थिति से नहीं बल्कि उसके हौसले और काम से होती है। जिस बच्चे को कभी सर्कस में भेजने के लिए 5 लाख रुपये की पेशकश की गई थी आज वही बच्चा डॉक्टर बनकर मरीजों की जिंदगी बचाने के काम में जुटा है। KBC की हॉट सीट पर गणेश की मौजूदगी ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि सपनों की कोई ऊंचाई नहीं होती और मजबूत इरादों के सामने मुश्किल से मुश्किल रास्ता भी आसान हो सकता है।
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