
नई दिल्ली। अयोध्या (Ayodhya) में भव्य राम मंदिर (Ram Mandir) के निर्माण के साथ जिस तरह देश-दुनिया से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी, उसी अनुपात में मंदिर के प्रबंधन की चुनौती भी बढ़ी। करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, रोजाना आने वाला भारी चढ़ावा और मंदिर की सुरक्षा जैसे मुद्दों के बीच प्रबंधन को लेकर उठे सवालों ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) को नई व्यवस्था पर विचार करने के लिए मजबूर किया। इसी क्रम में ट्रस्ट ने पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र (Former Air Marshal Jitendra Mishra) को अपना पहला सीईओ नियुक्त किया है। इसे मंदिर प्रशासन में सैन्य शैली के अनुशासन और जवाबदेही की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
पिछले दिनों मंदिर परिसर में चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद ट्रस्ट के सामने सबसे बड़ी चुनौती श्रद्धालुओं का भरोसा कायम रखना है। ऐसे में उम्मीद है कि मंदिर प्रशासन में स्पष्ट कमांड स्ट्रक्चर, पारदर्शी डिजिटल ऑडिट और सख्त जवाबदेही जैसी व्यवस्थाओं पर जोर दिया जाएगा। इससे मंदिर प्रबंधन को रोजाना की राजनीतिक बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप से अलग एक पेशेवर ढांचा देने की कोशिश होगी।
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र ही पहली पसंद क्यों?
राम मंदिर ट्रस्ट जब अपने पहले सीईओ की तलाश कर रहा था, तब उम्मीदवार के लिए कुछ स्पष्ट योग्यताएं तय की गई थीं। व्यक्ति के पास 20 साल से अधिक का प्रशासनिक अनुभव, सनातनी आचरण और रामभक्त होने के साथ 50 से 70 वर्ष की आयु होना जरूरी था। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और नौकरशाहों के बीच भी इन योग्यताओं वाले कई नाम थे, लेकिन पेशेवर अनुशासन, ईमानदारी और निस्वार्थ सेवा के अनुभव ने सैन्य पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को बढ़त दिलाई।
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के पक्ष में उनकी व्यक्तिगत और पेशेवर पृष्ठभूमि भी महत्वपूर्ण रही। वे अयोध्या के नजदीक देवरिया जिले के मूल निवासी हैं। इससे उन्हें क्षेत्र की भाषा, संस्कृति और सरयू पार के भूगोल से पुराना जुड़ाव है। वे ब्राह्मण परिवार से आते हैं और धार्मिक परंपराओं, कर्मकांड तथा सनातन मर्यादाओं की समझ भी रखते हैं।
उनकी सैन्य पृष्ठभूमि भी इस चयन में अहम मानी जा रही है। पिछले साल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारतीय सेनाओं की ओर से किए गए ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उन्होंने वायुसेना की वेस्टर्न कमांड का नेतृत्व किया। इस अभियान में भारतीय लड़ाकू विमानों ने बहावलपुर और मुरीदके जैसे आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इसी दौरान पाकिस्तान के करीब 300 किलोमीटर भीतर S-400 एयर डिफेंस सिस्टम से पाकिस्तानी विमान को मार गिराने का रिकॉर्ड भी उनके नेतृत्व से जोड़ा गया।
इन तमाम पहलुओं को देखते हुए ट्रस्ट के सामने एयर मार्शल मिश्र का नाम सबसे मजबूत विकल्प बनकर उभरा। माना गया कि उनके पास बड़े स्तर के संचालन, अनुशासन और संकट प्रबंधन का अनुभव है, जिसका इस्तेमाल राम मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में किया जा सकता है।
सेना के मैनेजमेंट मॉडल से कैसे बदलेगा मंदिर प्रशासन?
सख्त कमांड स्ट्रक्चर और जवाबदेही: सैन्य व्यवस्था में हर अधिकारी और कर्मचारी की भूमिका स्पष्ट होती है और किसी चूक की जिम्मेदारी तय रहती है। इसी तरह मंदिर प्रशासन में सुरक्षा, साफ-सफाई, पुजारी व्यवस्था, आईटी और अकाउंट्स जैसे विभागों के प्रमुखों की जिम्मेदारी स्पष्ट की जा सकती है। इससे किसी भी गड़बड़ी के बाद जवाबदेही तय करने में आसानी होगी और रिपोर्टिंग सिस्टम सीधे सीईओ तक पहुंच सकेगा।
वित्तीय पारदर्शिता और डिजिटल ऑडिट: चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद वित्तीय व्यवस्था को पारदर्शी बनाना बड़ी चुनौती है। सेना के स्टॉक और फंड मैनेजमेंट की तर्ज पर मंदिर में भी दानपेटियों को खोलने से लेकर चढ़ावे की गिनती तक पूरी प्रक्रिया को हाई-रिजॉल्यूशन कैमरों और बायोमेट्रिक निगरानी से जोड़ने की दिशा में काम हो सकता है। हर दान का रिकॉर्ड डिजिटल सिस्टम में दर्ज करने और रोजाना रीयल-टाइम वित्तीय ऑडिट की व्यवस्था भी मजबूत की जा सकती है।
जीरो टॉलरेंस और सख्त आचरण: सैन्य अनुशासन में सिफारिश और लापरवाही के लिए सीमित गुंजाइश होती है। मंदिर में कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए सख्त कोड ऑफ कंडक्ट लागू करना भी नई व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है। अनैतिक गतिविधि, वित्तीय गड़बड़ी या श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार की स्थिति में त्वरित कार्रवाई पर जोर दिया जा सकता है।
चुनौती सीमा की नहीं, व्यवस्था को मजबूत करने की
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र के सामने अब चुनौती किसी सीमा की सुरक्षा से अलग है। उन्हें दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक केंद्रों में शामिल हो चुके राम मंदिर की विशाल व्यवस्था को अनुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ संचालित करने की जिम्मेदारी मिली है।
‘ऑपरेशन अयोध्या’ के जरिए यह साबित करना उनके सामने बड़ी चुनौती होगी कि आस्था के इतने बड़े केंद्र का प्रबंधन भी आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था और सैन्य अनुशासन के साथ प्रभावी ढंग से चलाया जा सकता है। देवरिया से जुड़ा यह सैन्य अधिकारी अब अयोध्या में राम मंदिर प्रशासन की कमान संभाल रहा है और उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती व्यवस्था में किसी भी तरह की ढिलाई और अनियमितता के लिए जीरो टॉलरेंस कायम करना होगी।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved