
नई दिल्ली । सपा प्रमुख अखिलेश यादव (SP Chief Akhilesh Yadav) ने कहा कि लोकतंत्र में (In Democracy) छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाना (Suppressing voices of Students and Youth) स्वीकार्य नहीं है (Is Unacceptable) ।
संसद परिसर और राजधानी में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन को लेकर समाजवादी पार्टी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत कई सांसदों ने युवाओं की मांगों को जायज बताते हुए पुलिस कार्रवाई की निंदा की और सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भाजपा अपने सहयोगियों पर इस्तीफे का दबाव इसलिए नहीं बना पा रही है, क्योंकि उसे डर है कि कहीं दबे हुए राज सामने न आ जाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि आजादी के बाद किसी सरकार ने युवाओं के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया होगा। लोकतंत्र में छात्रों और युवाओं की आवाज को दबाना स्वीकार्य नहीं है।
सपा सांसद डिंपल यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि प्रदर्शन करने पहुंचे युवा सरकार को यह बताना चाहते थे कि उसका सिस्टम बीमार हो चुका है और उनके हितों की रक्षा नहीं कर रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। यह एक निर्मम सरकार है, जिसे युवाओं के आंसुओं पर भी दया नहीं आ रही। डिंपल यादव ने शिक्षा मंत्री को पद से हटाने की मांग दोहराते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार को बदलने का सबसे बड़ा माध्यम वोट है।
सपा सांसद राम गोपाल यादव ने सवाल उठाया कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वास्तव में युवाओं के साथ हैं, तो फिर युवा अनशन पर क्यों बैठे हैं। प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा किए गए कथित लाठीचार्ज निंदनीय है। जब छात्र शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे, तो उनको क्यों मारा गया? शांतिपूर्ण विरोध लोकतांत्रिक अधिकार है और इस पर बल प्रयोग उचित नहीं है। वहीं, सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि देशभर के लाखों बेरोजगार युवा पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर अपनी आवाज उठाने दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन उनकी समस्याएं सुनने के बजाय उन पर लाठीचार्ज किया गया। उन्होंने राम मंदिर चढ़ावा चोरी का जिक्र करते हुए कहा कि इस मामले पर भी चर्चा होनी चाहिए और दोषियों को बचाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
सपा सांसद वीरेंद्र सिंह ने कहा कि भारत लोकतांत्रिक देश है और महात्मा गांधी ने जन आंदोलनों की अहमियत सिखाई है। उनके अनुसार छात्र इसलिए सड़कों पर उतरे, क्योंकि उनकी बात नहीं सुनी जा रही थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने संवेदनशीलता नहीं दिखाई और पूरे मामले को कमजोर करने की कोशिश की। युवाओं की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाए और लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
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