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टीएमसी विधायक मुकुल रॉय को अयोग्य घोषित करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी सुप्रीम कोर्ट ने

January 16, 2026


नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने टीएमसी विधायक मुकुल रॉय को अयोग्य घोषित करने के (Disqualifying TMC MLA Mukul Roy) कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी (Stayed Calcutta High Court Order) ।


  • सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल के टीएमसी नेता मुकुल रॉय को पश्चिम बंगाल विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी । मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह अंतरिम आदेश मुकुल रॉय के पुत्र शुभ्रांशु रॉय द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी करते हुए दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि हाईकोर्ट के फैसले के प्रभाव को अगली सुनवाई तक स्थगित रखा जाएगा।

    मुकुल रॉय ने 2021 के विधानसभा चुनाव में कृष्णानगर नॉर्थ सीट से भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन चुनाव के बाद वे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल हो गए। इसके आधार पर भाजपा के नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी और विधायक अंबिका रॉय ने मुकुल रॉय के खिलाफ दलबदल याचिकाएं दाखिल की थीं। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ने इन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसके बाद सुवेंदु अधिकारी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख किया। हाईकोर्ट ने अध्यक्ष के फैसले को पलटते हुए मुकुल रॉय को अयोग्य घोषित कर दिया था। टीएमसी नेता मुकुल रॉय के बेटे शुभ्रांशु की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुवेंदु अधिकारी, अंबिका रॉय और विधानसभा सचिवालय को नोटिस जारी किया है, जिनको चार हफ्ते में जवाब देना है।

    मुकुल रॉय की ओर से एडवोकेट प्रीतिका द्विवेदी ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने सीमित न्यायिक समीक्षा की सीमा का उल्लंघन करते हुए सीधे विधायक को अयोग्य घोषित कर दिया, जो उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। उन्होंने यह भी बताया कि मुकुल रॉय की तबीयत खराब होने के कारण उनके बेटे ने याचिका दायर की है। कोलकाता हाईकोर्ट ने 13 नवंबर को मुकुल रॉय का विधायक पद रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने विधानसभा स्पीकर द्वारा उन्हें लोक लेखा समिति (पीएसी) का अध्यक्ष बनाने के फैसले को भी खारिज कर दिया था।

    जस्टिस देबांगसु बसाक और जस्टिस शब्बर रशीदी की बेंच ने विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया था। कोर्ट ने कहा, “दलबदल की तारीख से ही अयोग्यता लागू होती है। संवैधानिक पदाधिकारियों को समय पर फैसला लेना चाहिए, वरना लोकतंत्र खतरे में पड़ जाता।”

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