
उज्जैन। उज्जैन (Ujjain) के विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर (Mahakaleshwar Temple) के गर्भगृह में होने वाली ‘VIP पूजा’ और दर्शन व्यवस्था (Darshan System) को लेकर चल रहे विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने अपना अंतिम रुख साफ कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर के भीतर की व्यवस्थाएं संभालना प्रशासन का काम है, न कि न्यायपालिका का।
”अदालत तय नहीं करेगी मंदिर की व्यवस्था”
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति आर महादेवन और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा:
”महाकाल के दरबार में कोई VIP नहीं होता, वहां सब बराबर हैं। लेकिन मंदिर के भीतर किसे प्रवेश देना है और किसे नहीं, यह तय करना मंदिर प्रबंधन समिति और जिला प्रशासन का प्रशासनिक निर्णय है।”
मामले की मुख्य बातें
हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर
यह मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (इंदौर खंडपीठ) के अगस्त 2025 के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। हाईकोर्ट ने भी पूर्व में ‘VIP दर्शन’ को चुनौती देने वाली याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि ‘VIP’ शब्द की कोई कानूनी परिभाषा नहीं है।
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