नई दिल्ली/इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनावों को लेकर हालात तनावपूर्ण बताए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर #MassacreInPoK तेजी से ट्रेंड कर रहा है, जहां कई स्थानीय यूजर्स और कार्यकर्ता सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अत्यधिक बल प्रयोग करने के आरोप लगा रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
चुनावों के विरोध के बीच बढ़ा तनाव
स्थानीय संगठनों के अनुसार, रावलकोट और आसपास के इलाकों में चुनाव प्रक्रिया का विरोध करते हुए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे अपने राजनीतिक और नागरिक अधिकारों की मांग कर रहे थे। वहीं सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो और पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि सुरक्षा बलों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया।
अस्पतालों और राहत व्यवस्था को लेकर भी आरोप
सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से किए जा रहे दावों में आरोप लगाया गया है कि घायलों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी। कुछ यूजर्स ने अस्पतालों तक पहुंच बाधित होने और एंबुलेंस सेवाओं में दिक्कतों का भी दावा किया है। इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय कार्यकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की
जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JKJAAC) सहित कुछ स्थानीय संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संस्थाओं से घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
भारत ने चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
भारत सरकार ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में कराए जा रहे विधानसभा चुनावों को स्वीकार नहीं किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इन चुनावों को वैध नहीं मानता और उसका रुख है कि पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न हिस्सा है।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान को क्षेत्र में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का दिखावा करने के बजाय वहां के लोगों के अधिकारों और विकास पर ध्यान देना चाहिए।
आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
PoK से सामने आ रही जानकारी का बड़ा हिस्सा सोशल मीडिया पोस्ट, स्थानीय दावों और कार्यकर्ताओं के बयानों पर आधारित है। अब तक पाकिस्तान की ओर से इन सभी आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा भी इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर जांच और आधिकारिक सूचनाओं के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
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