
नई दिल्ली। सरकारी कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग से जुड़ी एक बड़ी और अहम खबर आ रही है। सरकारी कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों में किसी भी तरह के बदलाव की सिफारिश करने से पहले आयोग से जानना चाहता है कि सरकार अभी अपने कर्मचारियों पर कितना पैसा खर्च कर रही है। आयोग ने सरकार के सभी मंत्रालयों और संगठनों से कर्मचारियों की सैलरी और भत्तों से जुड़ी सभी जानकारी को अपने ऑनलाइन डेटा पोर्टल पर 30 जून तक जमा करने के लिए कहा है। इस कदम का उद्देश्य एक ऐसा सिंगल डिजिटल डेटाबेस बनाना है, जिसका इस्तेमाल आयोग अपनी सिफारिशें तैयार करते समय कर सके।
8वें वेतन आयोग ने मंत्रालयों और विभागों से पिछले 3 वित्तीय वर्षों- 2022-23, 2023-24 और 2024-25 के लिए खर्च के विस्तृत आंकड़े देने के लिए भी कहा है। डेटा में ये मालूम चलना चाहिए कि लेवल 1 से लेवल 18 तक के सभी पे मैट्रिक्स लेवल पर सैलरी और अलग-अलग तरह के भत्तों पर कितना खर्च हुआ है। आयोग सिर्फ बेसिक सैलरी पर ही ध्यान नहीं दे रहा है, बल्कि वो अलग-अलग मदों के तहत होने वाले पूरे खर्च भी पूरा ध्यान रख रहा है।
इसमें बेसिक पे और मिलिट्री सर्विस पे (जहां लागू हो), महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), परिवहन भत्ता (TPTA), जोखिम और कठिनाई भत्ता, रेलवे कर्मचारियों के लिए रनिंग स्टाफ भत्ता, नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस (NPA) और कर्मचारियों को दिए जाने वाले अन्य भत्ते शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि हर वित्तीय वर्ष में भत्तों पर हुए पूरे खर्च की जानकारी भी देनी होगी।
बताते चलें कि वेतन आयोग द्वारा अपनी सिफारिशें तैयार करने से पहले इस डेटा को इकट्ठा करना, सबसे अहम और महत्वपूर्ण शुरुआती प्रक्रियाओं में से एक है। अलग-अलग पे-लेवल पर सैलरी और भत्तों पर सरकार अभी कितना खर्च करती है, इसका अध्ययन करके कमीशन भविष्य में होने वाले बदलावों के आर्थिक असर का बेहतर अंदाजा लगा पाएगा। इस जानकारी से पे कमीशन को संशोधित पे-स्केल, भत्तों, कुल सरकारी खर्च और लंबे समय तक आर्थिक स्थिरता के बारे में सुझाव तैयार करने में मदद मिलेगी।
जानकारी की मात्रा को देखते हुए, जरूरत पड़ने पर कमीशन समय-सीमा बढ़ा सकता है। डेटा इकट्ठा करने का काम पूरा होने के बाद, उम्मीद है कि कमीशन 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट पर अपने काम के अगले चरण में बढ़ने से पहले आंकड़ों का विश्लेषण शुरू करेगा।
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