
इंदौर। भागीरथपुरा कांड को पहले दिन से सरकारी मशीनरी ने जिस तरह गंभीरता से नहीं मिला उसके परिणाम स्वरूप यह राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा तो बना ही, वहीं हाईकोर्ट में भी जमकर किरकिरी हुई। स्वास्थ्य विभाग तो पूरी तरह से एक्सपोज ही हो गया, जो यह नहीं बता सका कि आखिर दूषित पानी या अन्य कारण से मौतें हुईं। यहां तक कि वर्बल आटोप्सी पर भी सीएमएचओ कोई जवाब नहीं दे पाए। हालांकि प्रशासन ने 16 मौतें दूषित पानी से होना बताई। हाईकोर्ट इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और उसने अपनी निगरानी में ही जांच कराने का निर्णय लिया और सेवानिवृत्त न्यायाधीश और जांच आयोग नियुक्त करते हुए महीनेभर में रिपोर्ट भी मांग ली।
पिछले दिनों अग्रिबाण ने भी यह खुलासा किया था कि अभी तक शासन-प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग यह तय नहीं कर पाया है कि भागीरथपुरा में हुई लगातार मौतों का स्पष्ट कारण क्या है। बाद में होने वाली मौतों का स्वास्थ्य विभाग लगातार खंडन भी करता रहा और अन्य बीमारियों से ये मौतें होना बताई। हालांकि परिजन इससे संतुष्ट नहीं हुए और शव रखकर चक्काजाम करने की नौबत तक पिछले दिनों आई। हाईकोर्ट चूंकि इस मामले की लगातार सुनवाई कर रहा है और कल जब प्रशासन ने यह बताया कि 16 मौतें दूषित पानी से हुई है, तो पलटकर हाईकोर्ट ने पूछा कि जो अन्य मौतें हुईं उसे कैसे प्रमाणित किया गया कि ये दूषित पानी से नहीं हुई और ये मौखिक पोस्टमार्टम क्या होता है।
इस पर कोर्ट में मौजूद अफसर बगलें झांकने लगे और स्वास्थ्य विभाग भी स्पष्ट जवाब नहीं दे पाया। देर रात जस्टिस विजयकुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बैंच ने इस मामले को लेकर आदेश भी जारी किया, जिसमें बिन्दुवार यह भी बताया गया कि जांच आयोग किस तरह काम करेगा और एक महीने में अपनी रिपोर्ट देगा। हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुशील कुमार गुप्ता को जांच आयोग नियुक्त किया है। कल बहस के दौरान वरिष्ठ अभिभाषक अजय बागड़िया ने भी सरकारी मशीनरी की पोलपट्टी तर्कपूर्ण जवाबों से खोली।
हालांकि उन्होंने जिम्मेदारों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग भी कोर्ट से की। हालांकि उसे तो मंजूर नहीं किया, मगर कोर्ट ने शासन-प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट को आंकड़ेबाजी बताया और दो टूक कहा कि इस पूरे मामले में गंभीरता से जांच ही नहीं की गई है और विरोधाभासी जानकारियां दी गई। मौत के आंकड़ों पर भी सवाल उठे और कोर्ट ने कहा कि मीडिया लगातार इस मामले में हो रही मौतों की जानकारी प्रकाशित भी कर रहा है। यह भी उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट में निगम ने भी प्रस्तुत अपने जवाब में बताया कि साढ़े 9 किलोमीटर लम्बाई की पाइप लाइनें बदली जा चुकी है और पूरे भागीरथपुरा क्षेत्र में 26 किलोमीटर लम्बा पानी का जल वितरण सिस्टम है और पानी की जांच भी लगातार की जा रही है और टैंकरों के जरिए जलप्रदाय करते हुए बोरिंगों से सप्लाय पूरी तरह से बंद कर दी गई है।
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