
नई दिल्ली । कृत्रिम मेधा एआई (AI) के तेजी से फैलते दौर में भारत(India) के सामने सबसे बड़ी चुनौती रोजगार सृजन(employment generation) की है। पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम(Former Finance Minister P. Chidambaram) ने चेतावनी दी है कि देश को हर वर्ष कम से कम 80 लाख नई नौकरियां(80 lakh new jobs) पैदा करनी होंगी, जबकि वास्तविक आवश्यकता इससे भी अधिक हो सकती है। उन्होंने कहा कि आधिकारिक बेरोजगारी दर भले 5.1 प्रतिशत बताई जाती हो, लेकिन वास्तविक स्थिति अधिक गंभीर है। युवा बेरोजगारी दर 15 प्रतिशत के आसपास है और करीब 55 प्रतिशत लोग स्वरोजगार या दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं, जो स्थायी और सुरक्षित रोजगार नहीं माना जा सकता।
चिदंबरम ने कहा कि एआई मानव क्षमताओं और उत्पादकता को कई गुना बढ़ा सकता है, लेकिन इसके कारण बड़े पैमाने पर नौकरियां खत्म होने का खतरा भी है, खासकर वाइट कॉलर नौकरियों में। उन्होंने डारियो अमोदेई के चर्चित निबंध का हवाला देते हुए कहा कि एआई अभूतपूर्व गति से श्रम बाजारों को प्रभावित कर सकता है। उन्होंने आशंका जताई कि टिकट चेकर, कंडक्टर, स्टेनोग्राफर, टाइपिस्ट, बैंक कर्मचारी, अनुवादक और निजी शिक्षक जैसी कई पारंपरिक नौकरियां स्वचालन की भेंट चढ़ सकती हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एआई को भविष्य और समृद्धि का द्वार बताया है, लेकिन चिदंबरम का कहना है कि भारत जैसे देश में, जहां बड़ी युवा आबादी है और शिक्षा की गुणवत्ता असमान है, वहां एआई अवसर के साथ गंभीर जोखिम भी लेकर आएगा। विकसित देशों में लगभग सभी लोग स्कूली शिक्षा पूरी करते हैं और बड़ी संख्या में उच्च शिक्षा तक पहुंचती है, जबकि भारत में उच्चतर माध्यमिक स्तर पर नामांकन घटता जाता है। उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात 45 से 50 प्रतिशत के बीच है, लेकिन अधिकांश स्नातक रोजगार योग्य कौशल से वंचित रहते हैं।
उन्होंने आगाह किया कि यदि शहरी क्षेत्रों में भी रोजगार घटे और आईटी जैसे क्षेत्रों में शिक्षित युवाओं को अवसर न मिलें, तो सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है। हाल के वर्षों में कई बड़ी कंपनियों द्वारा छंटनी की घोषणाएं इस खतरे की ओर संकेत करती हैं। चिदंबरम ने सुझाव दिया कि भारत को शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण प्रबंधन में बड़े निवेश की जरूरत है। उच्च माध्यमिक स्तर पर छात्रों को योग्यता के आधार पर शैक्षणिक और कौशल आधारित धाराओं में विभाजित किया जाए तथा गैर-रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की समीक्षा की जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि एमएसएमई क्षेत्र देश में सबसे बड़ा रोजगार सृजक है और यदि एआई का उपयोग इन उद्यमों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए किया जाए, तो रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही, एआई से लाभ कमाने वाली कंपनियों पर रोजगार सृजन की सामाजिक जिम्मेदारी तय करने की जरूरत है।
चिदंबरम ने अंत में चेताया कि यदि काम के अवसर कम होते गए तो समाज एक कठिन भविष्य की ओर बढ़ेगा, क्योंकि ‘काम’ ही मनुष्य की पहचान है। आने वाले वर्षों में एआई का प्रभाव और स्पष्ट होगा, इसलिए अभी से ठोस नीति और दूरदर्शी कदम उठाने की आवश्यकता है।
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