नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में MGNREGA (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) का नाम बदलकर विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) अधिनियम, 2025 कर दिया गया है। देश के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध किया है। अब कांग्रेस की कर्नाटक सरकार ने MGNREGA योजना को खत्म करने को संवैधानिक और कानूनी रूप से चुनौती देने का फैसला किया है। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया है कि इस मुद्दे को जनता की अदालत में ले जाया जाएगा।
“ग्रामीण भारत के साथ बड़ा अन्याय”
प्रियंक खड़गे ने कहा, “मनरेगा को खत्म करना ग्रामीण इलाकों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। हमने दो दिन का विशेष सत्र इसी मुद्दे पर बुलाया है। हमने जनता के सामने साफ किया है कि नए कानून और मनरेगा में क्या फर्क है और इसका सामाजिक व आर्थिक असर क्या होगा। हम इस फैसले को संविधान, कानून और जनता—तीनों के सामने चुनौती देंगे।”
केंद्र के फैसले पर कांग्रेस का तीखा हमला
इससे पहले कर्नाटक सरकार के मंत्री एच.के. पाटिल ने भी केंद्र के फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘तानाशाही भरा और क्रूर निर्णय बताया था। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने ग्रामीण लोगों को काम का अधिकार दिया था, जिसे अब छीन लिया गया है। पाटिल ने कहा, “मनरेगा ग्रामीण मज़दूरों और कृषि श्रमिकों के लिए जीवनरेखा थी। केंद्र सरकार ने यह अधिकार उनसे छीन लिया है।”
देशभर में कांग्रेस का ‘मनरेगा बचाओ’ आंदोलन
मनरेगा को हटाने के विरोध में कांग्रेस ने ‘मनरेगा बचाओ’ नाम से तीन चरणों वाला राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करने का एलान किया है। नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर रोजगार गारंटी योजना को केंद्रीकृत करने और मनमाने तरीके से काम करने का आरोप लगाया। वेणुगोपाल ने कहा कि कांग्रेस कार्य समिति ने “मनरेगा बचाओ संग्राम” नाम से एक व्यवस्थित अभियान को मंजूरी दी है।
आंदोलन का कार्यक्रम:
उन्होंने कहा, “पहला चरण 8 जनवरी को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालयों में पूरे दिन की तैयारी बैठक के साथ शुरू होगा।” वेणुगोपाल ने आगे कहा, “10 जनवरी को जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस होंगी, जिसके बाद 11 जनवरी को जिला मुख्यालयों पर महात्मा गांधी और बीआर अंबेडकर की मूर्तियों के पास एक दिन का उपवास रखा जाएगा।” पार्टी के अनुसार, अभियान का दूसरा चरण 12 जनवरी से 30 जनवरी तक चलेगा। वेणुगोपाल ने कहा, “सभी ग्राम पंचायतों में पंचायत स्तर पर चौपाल आयोजित की जाएंगी, और कांग्रेस अध्यक्ष का एक पत्र पहुंचाया जाएगा।”
मनरेगा पर सियासत गरम
उन्होंने कहा कि विधानसभा स्तर पर नुक्कड़ सभाएं और पैम्फलेट बांटने की भी योजना है। उन्होंने कहा, “30 जनवरी को शहीद दिवस पर, पार्टी मनरेगा मजदूरों के साथ वार्ड स्तर पर शांतिपूर्ण धरना देगी।” वेणुगोपाल ने कहा, “तीसरा चरण 31 जनवरी को जिला स्तर पर डीसी और डीएम कार्यालयों में मनरेगा बचाओ धरने के साथ शुरू होगा और 6 फरवरी तक चलेगा।” उन्होंने आगे कहा, “इसके बाद 7 फरवरी से 15 फरवरी तक विधानसभा भवनों का राज्य स्तरीय घेराव किया जाएगा और 16 फरवरी से 25 फरवरी के बीच देश भर में चार आंचलिक AICC रैलियां होंगी।” यानी मनरेगा को लेकर अब केंद्र और कांग्रेस शासित राज्यों के बीच टकराव तेज़ हो गया है। कर्नाटक सरकार का कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक योजना की नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के अधिकारों की है।
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