
सिवनी। मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित प्रसिद्ध पेंच टाइगर रिजर्व की सबसे चर्चित और उम्रदराज बाघिन ‘लंगड़ी बाघिन’ (PN-20) ने आखिरकार दुनिया को अलविदा कह दिया। करीब 18 वर्ष की आयु तक जंगल में अपना वर्चस्व बनाए रखने वाली इस बाघिन का शव कर्माझिरी रेंज के मुनारा क्षेत्र में मिला। सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की गाइडलाइंस के अनुसार पोस्टमार्टम कर पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया गया।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार लंगड़ी बाघिन को 6 मार्च 2026 को आखिरी बार जंगल में देखा गया था। इसके बाद 7 मार्च की सुबह कर्माझिरी रेंज के मुनारा कैम्प के पास उसका शव पड़ा मिला। मामले की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम ने पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू की और वरिष्ठ वन्यजीव पशु चिकित्सकों को मौके पर बुलाया गया। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मौके पर ही बाघिन का पोस्टमार्टम कर मौत के कारणों की जांच की।
वन अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के नियमों के अनुसार किसी भी वन्यजीव की मौत के बाद उसके अंगों की तस्करी या दुरुपयोग को रोकने के लिए विधिवत पोस्टमार्टम करना अनिवार्य होता है। पोस्टमार्टम के बाद वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में चिता बनाकर बाघिन का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान वन कर्मचारियों ने उसे श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
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