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स्टार्मर युग का अंत! एंडी बर्नहैम के उभार से ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव, नए पीएम बनने की राह साफ

June 23, 2026

लंदन। ब्रिटेन की राजनीति (Britain’s Politics) में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लेबर पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही खींचतान के बीच प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर (Keir Starmer) का नेतृत्व चुनौती के घेरे में आ गया है। हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद एंडी बर्नहैम को पार्टी और सरकार की कमान संभालने का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है।

ग्रेटर मैनचेस्टर के पूर्व मेयर और हाल ही में उपचुनाव जीतकर संसद पहुंचे बर्नहैम ने पार्टी के भीतर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है। माना जा रहा है कि उनके बढ़ते प्रभाव ने लेबर पार्टी के नेतृत्व में बदलाव का रास्ता तैयार किया है।

पुराना है स्टार्मर और बर्नहैम का मतभेद

कीर स्टार्मर और एंडी बर्नहैम के बीच वैचारिक और राजनीतिक मतभेद कोई नई बात नहीं है। वर्ष 2020 में स्टार्मर के लेबर पार्टी प्रमुख बनने के बाद से ही बर्नहैम कई मुद्दों पर नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह शिकायत भी की थी कि पार्टी के प्रमुख मंचों पर उन्हें पर्याप्त अवसर नहीं दिया जाता।

कोविड-19 महामारी के दौरान ग्रेटर मैनचेस्टर में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण बर्नहैम को “किंग ऑफ द नॉर्थ” के नाम से भी पहचान मिली थी। इसी दौर में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी राजनीतिक छवि को और मजबूत किया।.



  • संसद पहुंचते ही बढ़ा कद

    हालिया उपचुनाव में जीत दर्ज कर संसद में पहुंचने के बाद बर्नहैम का राजनीतिक प्रभाव और बढ़ गया। उनके समर्थकों का मानना है कि वह ऐसे नेता हैं जो आम मतदाताओं से बेहतर संवाद स्थापित कर सकते हैं और दक्षिणपंथी दलों की बढ़ती चुनौती का मुकाबला करने की क्षमता रखते हैं।

    लेबर पार्टी के कई सांसद भी उनके नेतृत्व कौशल की सराहना कर चुके हैं। उनका मानना है कि बर्नहैम की राजनीतिक दृष्टि और जनसंपर्क क्षमता पार्टी को नई ऊर्जा दे सकती है।

    नेतृत्व की दौड़ में आगे निकले बर्नहैम

    लेबर पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं के बीच पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग, उपप्रधानमंत्री एंजेला रेनर और गृह मंत्री यवेट कूपर के नाम भी संभावित दावेदारों में शामिल थे। हालांकि, वेस स्ट्रीटिंग द्वारा बर्नहैम को समर्थन दिए जाने के बाद उनकी दावेदारी और मजबूत मानी जा रही है।

    राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर यही समर्थन बना रहता है तो बर्नहैम बिना किसी बड़े मुकाबले के नए नेता चुने जा सकते हैं। नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी होने तक कीर स्टार्मर पद पर बने रह सकते हैं।

    दो बार हार चुके हैं नेतृत्व चुनाव

    लिवरपूल में जन्मे एंडी बर्नहैम ने राजनीति में लंबा सफर तय किया है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की सरकारों में मंत्री के रूप में काम किया। वर्ष 2010 और 2015 में उन्होंने लेबर पार्टी का नेता बनने की कोशिश की थी, लेकिन दोनों बार उन्हें सफलता नहीं मिली।

    अब वर्षों बाद पार्टी नेतृत्व तक पहुंचने का उनका सपना पूरा होता दिखाई दे रहा है।



  • भारत-ब्रिटेन संबंधों पर भी नजर

    ब्रिटेन में नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं के बीच भारत की नजर दोनों देशों के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर भी टिकी हुई है। कीर स्टार्मर सरकार ने भारत के साथ आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया था और दोनों देशों के बीच हुए समझौते को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाए गए थे।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि एंडी बर्नहैम नेतृत्व संभालते हैं तो भारत-ब्रिटेन व्यापार संबंधों पर कोई नकारात्मक असर पड़ने की संभावना नहीं है। ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहते हुए भी उन्होंने भारत के साथ आर्थिक और कारोबारी सहयोग को बढ़ावा देने की वकालत की थी।

    ब्रिटेन की राजनीति में तेजी से बदलते घटनाक्रम अब इस सवाल का जवाब तय करेंगे कि लेबर पार्टी का अगला चेहरा कौन होगा और देश की सत्ता की कमान किसके हाथों में जाएगी।

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