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मोहन सरकार ने फिर लिया बड़ा कर्ज, 5800 करोड़ की नई उधारी; एक साल में 19वीं बार बाजार से पैसा उठाया

March 13, 2026

 

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश(Madhya Pradesh) की मोहन यादव सरकार (Mohan Yadav government)ने एक बार फिर (once again raised)बाजार से बड़ा कर्ज(substantial loan) लिया है। राज्य सरकार(state government secured) ने 10 मार्च को 5800 करोड़ रुपये की नई उधारी उठाई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के शेड्यूल(Reserve Bank of India (RBI) schedule) के मुताबिक यह चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में लिया गया अंतिम कर्ज माना जा रहा है। खास बात यह है कि इस वित्तीय वर्ष(financial year,) में राज्य सरकार(the state government) अब तक 19 बार बाजार से उधार ले चुकी है, जिससे प्रदेश के कुल कर्ज का आंकड़ा और बढ़ गया है।

जानकारी के अनुसार सरकार ने यह 5800 करोड़ रुपये तीन अलग-अलग किश्तों में उठाए हैं। पहली किश्त 1900 करोड़ रुपये की है, दूसरी किश्त 1700 करोड़ रुपये की और तीसरी किश्त 2200 करोड़ रुपये की है। इन तीनों किश्तों के जरिए सरकार को कुल 5800 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होगी।

वित्तीय आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्तीय वर्ष में मध्य प्रदेश सरकार ने अब तक करीब 85 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। इस नई उधारी के बाद प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ बढ़कर 5 लाख 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। लगातार बढ़ती उधारी को लेकर प्रदेश की सियासत भी गरमा गई है और सरकार तथा विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।

राज्य सरकार का कहना है कि यह कर्ज तय वित्तीय सीमा के भीतर लिया जा रहा है और इसका उपयोग विकास कार्यों, बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने के लिए किया जाएगा। सरकार के मुताबिक लाडली बहना योजना समेत कई सामाजिक योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को सुचारू रूप से चलाने के लिए वित्तीय संसाधनों की आवश्यकता होती है, जिसके चलते बाजार से उधारी ली जा रही है।

वहीं विपक्ष ने इस मुद्दे को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि मोहन यादव सरकार कर्ज लेने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के रिकॉर्ड को भी पार कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश को कर्ज के बोझ तले दबा रही है और कई वादे अभी तक पूरे नहीं किए गए हैं।

पटवारी ने लाडली बहना योजना को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को 3000 रुपये देने का वादा किया गया था, लेकिन यह वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि राज्य में चल रही बड़ी सामाजिक योजनाओं, निवेश को बढ़ावा देने की कोशिशों और बुनियादी ढांचे के विस्तार के कारण सरकार को लगातार वित्तीय संसाधनों की जरूरत पड़ रही है। यही वजह है कि सरकार समय-समय पर बाजार से कर्ज उठाकर अपनी योजनाओं और परियोजनाओं के लिए धन जुटा रही है।

  • गौरतलब है कि इससे पहले भी होली से ठीक पहले मध्य प्रदेश सरकार ने करीब 6300 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। लगातार बढ़ती उधारी को लेकर आने वाले समय में प्रदेश की वित्तीय स्थिति और राजनीतिक बहस दोनों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

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