
भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती (Uma Bharti) ने देश एवं प्रदेश की शिक्षा एवं स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है सरकार अस्पताल (Hospital) और स्कूलों (Schools) के लिए आया सारा पैसा भवन बनाने पर ही खर्च होता है। शिक्षा एवं स्वास्थ की क्वालिटी सेवा का अस्तित्व ही गिर गया। जिसमें मप्र और उप्र जैसे राज्य भी हैं।
उमा (Uma) ने ट्वीट के जरिए कहा कि ‘पेट भरने के लायक कमाई करने वाले लोगों को भी प्रायवेट स्कूल (Private School) की महंगी फीस (Fees) देने के अलावा कोई विकल्प नहंीं बचा। अभावग्रस्त तथा दीन दरिद्र लोग सरकार सुविधाओं से वंचित हो गए, उन्हें अपने प्रियजनों की जान बचाने के लिए जेवर, जमीनें तथा घर बेचकर प्रायवेट अस्पतालों के बिल देने पड़े हैं। शायद इस कोरोना (Corona) के गहराते संकट काल में ही हम अपनी भूल सुधारने के लिए विवश हो जाएं एवं स्वास्थ्य की सरकारी सेवाओं को गरीबोन्मुखी कर सकें। अचानक शिक्षा एवं स्वास्थ्य का व्यावसायीकरण शुरू हुआ। इनके माध्यम से पैसे कमाने की होड़ शुरू हुई। निर्लज्जता एवं अमानीवयता के साथ फीसें वसूली जाने लगीं तथी धीरे-धीरे सरकारी स्कूलों और अस्पतालों का स्तर गिरा।
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