नई दिल्ली। पाकिस्तान में आतंकवाद (Terrorism in Pakistan) और आंतरिक सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। पाकिस्तानी पंजाब (Pakistani Punjab) की मुख्यमंत्री मरियम नवाज (Maryam Nawaz) ने लाहौर में AI हब और थ्रेट असेसमेंट सेंटर (PIFTAC) के उद्घाटन के दौरान ऐसा बयान दिया, जिसने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लिए सुरक्षा का खतरा भारत या अफगानिस्तान से ज्यादा उसके अपने पड़ोसी प्रांतों खैबर पख्तूनख्वा (KPK) और बलूचिस्तान से है।
मरियम के इस बयान को पाकिस्तान में बढ़ रही आंतरिक आतंकवादी गतिविधियों की गंभीरता की स्वीकारोक्ति के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर ऐसे समय में जब पाकिस्तान के कई इलाकों में आतंकी हमले और अलगाववादी हिंसा लगातार सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनी हुई है।
मरियम नवाज के बयान का सबसे अहम पहलू यह है कि उन्होंने सुरक्षा चुनौती के केंद्र में पाकिस्तान के अपने ही इलाकों का नाम लिया। खैबर पख्तूनख्वा लंबे समय से आतंकवादी गतिविधियों से प्रभावित रहा है, जबकि बलूचिस्तान में अलगाववादी संगठनों की गतिविधियां भी पाकिस्तान के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
यानी पाकिस्तान को एक तरफ बाहरी खतरों की बात करनी पड़ती है, तो दूसरी तरफ उसके सामने अपने ही देश के भीतर सक्रिय आतंकी और उग्रवादी संगठन बड़ी समस्या बनकर खड़े हैं।
भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने और अपनी जमीन से संचालित आतंकी नेटवर्क पर कार्रवाई न करने के आरोप लगाता रहा है। भारत का कहना रहा है कि पाकिस्तान की धरती से सक्रिय आतंकवादी संगठनों ने जम्मू-कश्मीर और भारत के दूसरे हिस्सों में कई हमले किए हैं।
पाकिस्तान हालांकि ऐसे आरोपों से इनकार करता रहा है और कई मौकों पर भारत पर ही आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगाता रहा है।
मरियम नवाज का ताजा बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान के भीतर से ही अब देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है।
भारत अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI पर आतंकवादी संगठनों को समर्थन देने के आरोप लगाता रहा है। पाकिस्तान इन आरोपों को खारिज करता आया है।
भारत का आरोप है कि पाकिस्तान लंबे समय तक सीमा पार आतंकवाद से जुड़े संगठनों को ‘नॉन-स्टेट एक्टर्स’ बताकर अपनी जिम्मेदारी से बचता रहा। कश्मीर मुद्दे पर भी दोनों देशों के बीच यही आरोप-प्रत्यारोप लंबे समय से जारी हैं।
हालांकि, मरियम नवाज के मौजूदा बयान में भारत के खिलाफ किसी पुराने आरोप की पुष्टि नहीं की गई है। उनका मुख्य जोर पाकिस्तान के भीतर मौजूद सुरक्षा चुनौतियों पर था।
आतंकवाद के वित्तपोषण पर कार्रवाई को लेकर पाकिस्तान पहले फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) की ग्रे लिस्ट में भी रह चुका है। उस दौरान पाकिस्तान पर आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने का अंतरराष्ट्रीय दबाव था।
पाकिस्तान ने बाद में अपनी वित्तीय और आतंकवाद-रोधी व्यवस्था में कई बदलाव किए और 2022 में FATF की ग्रे लिस्ट से बाहर हुआ।
मरियम नवाज पाकिस्तान के प्रमुख राजनीतिक परिवार से आती हैं। उनके पिता नवाज शरीफ पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री रह चुके हैं, जबकि उनके चाचा शहबाज शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री हैं।
ऐसे में पंजाब जैसे महत्वपूर्ण प्रांत की मुख्यमंत्री का यह कहना कि पाकिस्तान के लिए बड़ा सुरक्षा खतरा उसके अपने ही क्षेत्रों से पैदा हो रहा है, राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।
खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवादी संगठनों की गतिविधियां और बलूचिस्तान में अलगाववादी हिंसा पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था के सामने दोहरी चुनौती पेश करती हैं। एक तरफ सेना और सुरक्षा बलों को सीमा पर खतरे से निपटना होता है, तो दूसरी तरफ देश के भीतर आतंकी और उग्रवादी संगठनों से मुकाबला करना पड़ता है।
मरियम नवाज का बयान इसी आंतरिक संकट की ओर इशारा करता है। पाकिस्तान लंबे समय से भारत के साथ सुरक्षा विवाद को अपनी राजनीति का बड़ा हिस्सा बनाता रहा है, लेकिन अब उसके सामने यह सवाल भी उतना ही गंभीर है कि अपने ही घर में बढ़ते आतंकवाद और असंतोष से कैसे निपटा जाए।
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