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ये पॉलिटिक्स है प्यारे

March 16, 2026

टैंकर लगाने में बड़ा झोल, भाजपा-कांग्रेसी एक
गर्मी (Heat) शुरू हो गई है और जल्द ही निगम (Corporation) पानी के टैंकरों (Water tankers) को अनुबंधित करने जा रहा है। इसके बावजूद लोगों को पानी की परेशानी आती है, लेकिन इससे पार्षदों को कुछ लेना-देना नहीं, वो तो बस अपने पट्ठों के टैंकर लगाने में भिड़ गए हैं। बड़े स्तर पर पानी को लेकर निजी टैंकर लगाए जाते हैं और कई टैंकर तो अब सालभर चलने लगे हैं। अब एक बार फिर यह खेल निगम के गलियारों में खेला जा रहा है। भाजपा हो या कांग्रेस का पार्षद सब इस खेल में लगे हैं। आने वाले समय में निगम की पानी की टंकियों पर टैंकरों की कतारें बढऩे वाली हैं। हालांकि इन पर रोक लगान के लिए निगम जीपीएस भी लगवाता है, लेकिन अधिकांश टैंकर चालक जीपीएस किसी और वाहन पर लगाकर उसे वार्ड में घुमा देते हैं और पानी को बेच डालते हैं।

मोती-सत्तू को एक मंच पर ले आए
देपालपुर की राजनीति में अब असली राजनीति आने लगी है। विशाल पटेल के भाजपा में जाने के बाद यहां से दावा कर रहे मोती पटेल को झटका तब लगा था, जब यहां सत्यनारायण पटेल और राधेश्याम पटेल द्वारा संपर्क बढ़ा दिया गया था। तब से मोती नाराज चल रहे थे, लेकिन पिछले दिनों प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा आयोजित सम्मेलन में दोनों नेताओं को एक मंच पर बिठा दिया गया है। देपालपुर से ही टिकट का दावा करने वाले मोती पटेल भी अध्यक्ष की हां में हां मिला तो गए हैं, लेकिन अब उनके लिए अपने ही गांव की राजनीति की राह आसान नहीं दिखती।


  • ये भाजपा है यहां सब करना पड़ता है
    भाजपा में नए-नए आए अजा के एक नेता को जब आजीवन सहयोग निधि को कट्टे लेकर राशि इकट्ठा करने को कहा तो उन्होंने इसे टाल दिया और कहा कि वे बाद में जमा करवा देंगे। बात बढ़ी तो उन्होंने कहा कि उन्हें प्रदेश से पहले ही टारगेट आ चुका है, लेकिन नगर अध्यक्ष भी कहां मानने वाले थे। उन्होंने कहा कि नेताजी ये भाजपा है, यहां सबको कुछ न कुछ करना पड़ता है। रही बात प्रदेश का बहाना बनाने की तो हमारे यहां सब व्यवस्थाएं स्थानीय स्तर पर चलती है… और आखिर में नेताजी को एक कट्टा थमा ही दिया गया।

    कांग्रेसी सुधर जाए तो बात बनें
    कांग्रेस में जान फूंकने के लिए राहुल गांधी तो प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उनकी योजनाएं नीचे तक आते-आते धराशायी हो जाती है। प्रदेश में जीतू पटवारी भी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन कांग्रेसी है कि आगे पाट और पीछे सपाट वाली कहावत पर अभी भी चल रहे हैं। तीन दिन तक पटवारी ने ग्रामीण क्षेत्र का दौरा किया और ब्लाक स्तर पर कार्यकर्ताओं से बात की। कई जगह कार्यकर्ताओं ने अलग से बड़े नेताओं की शिकायत कर डाली और कहा कि उनके ही कारण कार्यकर्ता टूट रहा है और वह नहीं समझ पा रहा है कि कहां जाएं। फिर भी जीतू ने कहा कि सरकार बनाना है तो सबको एकसाथ मिलकर काम करना होगा। घर की लड़ाई फिर निपटा लेंगे। अब जीतू की सीख पर अगर कांग्रेसी एक होकर सुधर जाए तो बात बनें, लेकिन अभी भी नहीं लगता कि कभी कांग्रेस एक हो पाएगी।

    अब विशाल पटेल का क्या होगा?
    संजय शुक्ला तो शहर में एक बड़ा प्रोजेक्ट लाने की तैयारी में हैं और वे जी-जान से उसमें जुटे हुए हैं। राजनीतिक अवसरों पर वे नजर आते हैं, लेकिन विशाल पटेल के लिए अभी भाजपा की राह इतनी आसान नहीं दिख रही है। बड़े गांव की राजनीति करने वाले विशाल पटेल कोई दमखम वाला बड़ा पद लाने की तैयारी में हैं, लेकिन जिस तरह से प्रदेश में भाजपा के हालात हैं, उससे नहीं लगता कि विशाल को कोई बड़ा पद दिया जा सकता है। फिर उनके पहले महाराज के साथ आए लोगों को भी एडजस्ट करना भाजपा के ऊपर भारी पडऩे वाला है।

    ऐनवक्त पर सक्रिय होती है आप
    मैदानी तौर पर नदारद रहने वाली आम आदमी पार्टी प्रदेश में निगम चुनाव में सिंगरौली में अपना महापौर तो बनवा लाई, लेकिन फिर चुप बैठ गई। विधानसभा में कोई खास प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन अब अगले साल होने वाले नगर निगम चुनाव के पहले पार्टी के कुछ नेताओं ने अपने पैरों में चुनाव लडऩे के लिए घुंघरू बांध लिए हैं। कइयों ने तो अपनी मंशा पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष को बता दी है और वहां से केवल यही कहा गया है कि अभी इंतजार करो, चुनाव दूर है। तब तक पार्टी को नीचे स्तर तक ले जाने का काम करो, लेकिन कार्यकर्ता हैं कि ऐनवक्त पर ही सक्रिय होंगे।

    कार्यकर्ताओं की आवभगत बढ़ी
    भाजपा कार्यालय पर इन दिनों कार्यकर्ताओं की आवभगत बढ़ गई है। कार्यकर्ताओं को उनके हिसाब से फीकी और मीठी चाय भी मिल रही है तो उस पर डालने के लिए शुगर फ्री भी है। समय-समय पर गरमागरम कचोरी और समोसे भी कार्यकर्ताओं को चखने को मिल रहे हैं। सुमित मिश्रा की टीम के सहकार्यालय मंत्री रानू अग्रवाल सारी व्यवस्थाएं देख रहे हैं, जिन्हें खाने और खिलाने का शौक पहले से है। कोरोना के पहले रानू का एक रेस्टॉरेंट था, जहां के स्वाद की कई बड़े भाजपा नेता तारीफ कर चुके हैं।

    आजीवन सहयोग निधि को लेकर नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने अपने ही क्षेत्र के नेताओं और कार्यकर्ताओं को खरी-खोटी सुना दी। उन्होंने उन नेताओं की ओर इशारा किया, जो केवल हवाबाजी के लिए पद लेकर घूम रहे हैं। उन्होंन े पहले उनसे ही राशि जमा करने को कहा। कुछ तो सुमित का ये तेवर देख बगले झांकने लगे।
    -संजीव मालवीय

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