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ये पॉलिटिक्स है प्यारे

December 01, 2025

अब पदनाम में भी दिखने लगी भाजपा
कांग्रेस (Congress) के नेताओं के मन में भाजपा (BJP) का खौफ कितना ज्यादा है यह तो इसी से समझा जा सकता है कि अब पदनाम में भी उन्हें भाजपा नजर आने लगी है। मामला पिछले सप्ताह का है, जब कांग्रेस के मध्यप्रदेश के प्रभारी महासचिव हरीश चौधरी (Harish Choudhary) ने इंदौर सहित पांच जिलों में की गई संगठन मंत्री की नियुक्ति को रद्द कर दिया। चौधरी के इस आदेश से बखेड़ा खड़ा हो गया। फिर कहा गया कि संगठन मंत्री का पद कांग्रेस की डिक्शनरी में नहीं है। यह तो भाजपा में प्रचलित पद है और इस पद को कांग्रेस में कैसे स्थापित कर दिया। बाद में दम था, इसलिए सभी खामोश हो गए। फिर 24 घंटे के बाद संगठन महासचिव का नया पदनाम देकर इंदौर सहित पांच जिलों में पहले से की हुई नियुक्ति को नए पदनाम के साथ बहाल कर दिया गया। भाजपा का खौफ अब कांग्रेस के नेताओं के सिर चढ़कर बोल रहा है।

एकता यात्रा भाजपा की जरूरत
लौह-पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के जन्म के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर भाजपा द्वारा इंदौर में एकता यात्रा निकाली गई। वैसे इस तरह की यात्रा निकालने में भाजपा की पीएचडी है। यात्रा का प्रचार करना, भीड़ जुटना और सफलता के साथ आयोजित कर लेना भाजपा को अच्छी तरह से आता है। इस यात्रा के आयोजन के मौके पर भी भाजपा के स्थानीय प्रमुख नेताओं में भी एकता स्थापित नहीं हो सकी। ऐसे में कहने वाले यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि इस तरह की एकता यात्रा की जरूरत तो भाजपा के नेताओं के बीच है। इंदौर के प्रभारी मंत्री भी कोशिश करके इन नेताओं के बीच एकता की स्थापना नहीं करवा पा रहे हैं।

पोडियम के नीचे ही रख दी माला
संविधान दिवस पर कांग्रेस के कार्यक्रम में यह घोषित था कि संविधान निर्माता बाबा साहब आंबेडकर की प्रतिमा पर कांग्रेस के नेता माल्यार्पण करेंगे। इसके बावजूद नगर निगम द्वारा आंबेडकर प्रतिमा पर सीढ़ी नहीं लगाई गई। निगम के अधिकारियों का कहना था कि हमारे पास एक ही सीढ़ी है और वह सीढ़ी पटेल प्रतिमा पर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के लिए लगा दी गई है। ऐसे में आंबेडकर प्रतिमा पर सीढ़ी लगा पाना संभव नहीं है। कांग्रेस के नेताओं ने निगम के अधिकारियों की मजबूरी को समझा और आंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बजाय प्रतिमा के पोडियम पैर नीचे की तरफ माला रखकर उसे माल्यार्पण मान लिया। इसे कहते हैं हालात के अनुरूप आचरण..

दिग्विजय का सवाल
इंदौर शहर कांग्रेस में पिछले दिनों हुए ऑडियो कांड और उसके बाद में लीपापोती की कोशिश के बाद भी मामला सुलझा नहीं है। दिखाने के लिए जरूर हर कोई सामान्य दिखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन राख के अंदर चिंगारी मौजूद है। पिछले दिनों संविधान दिवस के अवसर पर गीता भवन चौराहे पर जब शहर कांग्रेस ने कार्यक्रम का आयोजन किया तो उसमें भाग लेने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह पहुंचे थे। कार्यक्रम के लिए कोई अलग से मंच नहीं बनाया गया था, बल्कि मंच के रूप में एक स्थान को चिह्नित करते हुए कुछ कुर्सियां रख दी गई थीं। वहां पहुंचने के बाद दिग्गी राजा ने तत्काल शहर अध्यक्ष की तरफ रुख किया और पूछ लिया कि बता दीजिए हमें कहां बैठना है। राजा का यह सवाल सामान्य नहीं था, बल्कि ऑडियो में चिंटू को यह कहते हुए बताया गया था कि बड़े नेताओं को यदि इंदौर में आना है तो हमसे पूछना होगा। कहीं जाना है तो हमसे पूछना होगा। कटाक्ष में इस स्थिति का जवाब देते हुए राजा ने पूछ लिया कि बैठने का स्थान भी बता दो…

क्या एक नई परंपरा का होगा आगाज
सराफा बाजार में चाइनीज फूड आइटम बेचने वाले लोगों को और उसके साथ ही पिछले कुछ सालों में यहां आकर कारोबार करने वाले लोगों को हटा दिया गया है। हटाए गए कारोबारी आंदोलन कर रहे हैं। इन कारोबारी ने जब महापौर पुष्यमित्र भार्गव के घर पहुंचकर हंगामा किया तो उन्हें आश्वासन दिया गया कि आप लोगों को वैकल्पिक स्थान दिया जाएगा। यदि इन लोगों को वैकल्पिक स्थान दिया जाता है तो एक नई परंपरा का आगाज होगा। बिना किसी वैध अनुमति के लगने वाले ठेले का व्यवस्थापन नगर निगम के लिए आने वाले समय में एक चुनौती पैदा करेगा। अब देखना है कि इस परंपरा का निर्वहन कब, कहां से, कैसे होता है…हो सकता है कि इसके माध्यम से वर्तमान परिषद के खाते में एक और नवाचार जुड़ जाए…

नियुक्ति का इंतजार
भाजपा के शासनकाल में निगम-मंडल में होने वाली नियुक्ति का इंतजार लंबा होते जा रहा है। पहले कहा गया था कि बस नियुक्ति कर रहे हैं, फिर कह दिया गया कि दीपावली के बाद करेंगे, फिर कहा गया कि बिहार के चुनाव परिणाम के बाद होगा, लेकिन अभी भी नियुक्ति शुरू नहीं हुई है। हर बार एक नया आश्वासन जरूर मिल रहा है और दावा हो रहा है कि बस नियुक्ति होने में है। ऐसे में इंदौर के जो नेता नियुक्ति से लॉलीपॉप पाने की उम्मीद कर रहे हैं वह लगातार इधर से उधर भटकने में ही लगे हैं। अब तो यह नेता भी कहने लगे हैं कि इंतजार की इंतहा हो गई। क्या पता कब होंगी नियुक्तियां…?

शुक्ला की बसों से दुर्घटना
भाजपा विधायक गोलू शुक्ला के ट्रेवल्स की बसों द्वारा इंदौर-उज्जैन रोड पर लगातार दुर्घटना हो रही है, जिसमें किसी न किसी की मौत हो जाती है। पार्टी के विधायक की ट्रेवल्स होने के कारण बीजेपी इन दुर्घटनाओं को लेकर खामोश है, लेकिन कांग्रेस की खामोशी का कारण किसी को समझ में नहीं आ रहा है। वैसे भी शहर के प्रमुख मुद्दों पर कांग्रेस लंबे समय तक खामोश ही रहती है। इसीलिए तो कहा जाता है कि नाच न जाने आंगन टेढ़ा…
-डॉ. जितेन्द्र जाखेटिया

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