
फिर ट्रोल हुए भाजपा के अल्पसंख्यक नेता
पहले एनआरसी (NRC) और अब खामेनेई (Khamenei) के मारे जाने को लेकर भाजपा (BJP) के अल्पसंख्यक नेता ट्रोल हो रहे हैं। इनमें से एक तो प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चे के पदाधिकारी रह चुके हैं और एक को पार्टी पहले बाहर कर चुकी थी। दोनों ही नेताओं ने खामेनेई की तारीफ में अपनी फेसबुक पर कसीदे गढ़े हैं। एक ने लिखा है कि 86 बरस का हुसैनी शेर ना मैदान छोडक़र भागा ना ही यजीदयत के सामने झुका। दूसरे ने उन्हें मर्दे मुजाहिद बताया और कहा कि हम सबको वह अकेला कर गया और शहीद हो गया। ऐसा लग रहा है कि जैसे कोई घर का बुजुर्ग हमें छोडक़र चला गया हो। दूसरी ओर कांग्रेस की महिला पार्षद ने भी अपने फेसबुक पेज पर रोजा इफ्तार से पहले जब दुआ के लिए हाथ उठाए तो सबसे पहले ईरान के हक में दुआ कीं। अल्पसंख्यक नेताओं के इन संदेशों को हर कोई अलग-अलग तरह से ले रहा है।
ये फोटो क्या कहलाता है?
दो नंबरी विधायक रमेश मेंदोला के भतीजे रत्नेश मेंदोला के विमान में केन्द्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान के बगल में फोटो इंदौर की राजनीति में चर्चा में आ गया। छोटे मेन्दोला का फोटो उनके समर्थकों ने फेसबुक पर लोड कर दिया। इसके कई मायने निकाले जा रहे हैं।
बोरिंग के बहाने भाजपा पार्षदों की चल निकली
शहर में धड़ल्ले से बोरिंग हो रहे हैं, जबकि विभागीय मंत्री ने भागीरथपुरा कांड के बाद शहर में नए बोरिंग नहीं होने की बात कही थी। अब अधिकारी तो लकीर के फकीर हैं। जब हाथ में कागज का पुर्जा नहीं आएगा, आदेश का पालन नहीं होगा। इसका फायदा भाजपा के पार्षद उठा रहे हैं और शहर में बोरिंग पर बोरिंग हो रहे हैं। गर्मी आने वाली है, लेकिन कलेक्टर ने इस पर रोक नहीं लगाई है। 4 और 6 इंची बोरिंग का रेट तय है। इसमें पार्षद, पुलिस और स्थानीय नेता का हिस्सा भी शामिल है। सबकुछ हो रहा है और जवाबदार आंख मूंदकर तमाशा देख रहे हैं। देखे भी क्यों न? अधिकारियों की आदत है, जब आग लगेगी तभी कुआ खोदेंगे।े
बैठे-बिठाए पंगा ले लेते हैं देवेन्द्र यादव
गांधी भवन पर पत्थरबाजी क्या हुई, देवेन्द्र सक्रिय हो गए। उन्होंने लिख डाला कि भाजपा वालों से मिलने तो मुख्यमंत्री मोहन यादव पहुंच गए थे, लेकिन हम घायलों से मिलने कोई नहीं आया। अब बारी शहर अध्यक्ष चिंटू चौकसे की थी। चिंटू बोले कि सबसे पहले तो मैं देवेन्द्र यादव से ही मिलने उनके घर गया था, लेकिन मालूम पड़ा कि वे बस स्टैंड वाली लाज पर है। चूंकि दूसरे नेताओं से भी मिलना था, इसलिए मैं वहां से निकल गया। वैसे ये बता दें कि शहर अध्यक्ष बनने का सपना देखने वाले यादव की चौकसे से बन नहीं रही है, वहीं गांधी भवन पर एक दूसरे गुट का कब्जा भी हो गया है, इसलिए उनकी नाराजगी जायज है।
प्रदेश पदाधिकारी के यहां उमड़ रही भीड़
भाजपा के एक प्रदेश पदाधिकारी के यहां उमड़ रही भीड़ भाजपा के नेताओं में बेचैनी पैदा कर रही है। दरअसल गौरव रणदिवे ने जिस तरह से नगर भाजपा चलाई थी, उसी का फायदा उन्हें प्रदेश में बड़े पद के रूप में मिला है और गौरव के यहां हाजरी देने वालों की संख्या बढ़ गई है। उनके पुराने समर्थक तो रोज गौरव के नाम की चिलम भर ही रहे हैं, वहीं कुछ वरिष्ठ नेताओं को भी गौरव के घर पर मंडराते देखा गया है। मंडराए भी क्यों न, अगले साल चुनाव होने वाले हंै और महामंत्री होने के नाते गौरव का दखल भी इंदौर के टिकटों के फैसले में रहने वाला है।
शहर अध्यक्ष भी नहीं बनवा पा रहे अपने लोगों को
चिंटू चौकसे के सामने बड़ी विडंबना है कि वे कार्यकारिणी में अपने ही लोगों को उपकृत नहीं कर पाएंगे। कारण सबके सामने है। कांग्रेस संगठन के स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी स्थिति में 50 से ज्यादा पदाधिकारियों को शामिल नहीं किया जाए। अब इंदौर शहर में छोटी कार्यकारिणी बनने से रहीं। एक तो शहर में ही इतने नेता है कि हर किसी ने अपने नाम से रखे हैं। कुछ विघ्न संतोषी भी हैं, जो पद नहीं मिलने के बाद धमाल कर सकते हैं, जैसा चिंटू के अध्यक्ष बनने पर हुआ था। फिर प्रदेश के नेताओं को भी एडजस्ट करना है, इसलिए चिंटू ने अपने लोगों से कह रखा है मिल जो तो ठीक, नहीं मिले तो ठीक। -संजीव मालवीय
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