
नई दिल्ली ।भारतीय क्रिकेट टीम (Indian Cricket Team) के युवा बल्लेबाज और उपकप्तान (Vice Captain)तिलक वर्मा (Tilak Varma) इन दिनों अपनी बदली हुई बल्लेबाजी शैली को लेकर चर्चा में हैं। टी20 क्रिकेट (T20 Cricket) में पहले नंबर-3 पर बल्लेबाजी(Batting), करने वाले तिलक अब नंबर-5 पर उतर रहे हैं। बल्लेबाजी क्रम में इस बदलाव के साथ उनकी रणनीति में भी अंतर आया है। अब वह क्रीज पर पहुंचते ही पहली गेंद से बाउंड्री लगाने का अवसर तलाशते हैं। हालांकि, उनका आक्रामक रुख परिस्थितियों और गेंद की स्थिति पर निर्भर करता है।
नंबर-3 पर बल्लेबाजी करते समय तिलक के पास पारी को संभालने और अपनी लय बनाने के लिए अधिक समय होता था। वहीं, पांचवें स्थान पर उतरने के बाद उन्हें कम गेंदों में टीम के लिए उपयोगी योगदान देना पड़ता है। मध्यक्रम में बल्लेबाजी की इस जिम्मेदारी को समझते हुए उन्होंने अपने खेल के तरीके में बदलाव किया है।
तिलक की योजना पहली गेंद से बड़ा शॉट खेलने की रहती है, लेकिन वह इसके लिए परिस्थितियों का भी ध्यान रखते हैं। यदि गेंद अनुकूल हो तो वह चौका या छक्का लगाने की कोशिश करते हैं। अगर पहली गेंद पर बड़ा शॉट खेलने का सही मौका नहीं मिलता, तो वह जल्दबाजी करने के बजाय पारी को आगे बढ़ाने पर ध्यान देते हैं।
उनकी रणनीति में सिंगल और डबल लेकर स्ट्राइक रोटेट करना भी शामिल है। वह मैदान में खाली जगह तलाशते हैं और उपलब्ध अवसरों के अनुसार रन जुटाते हैं। उनका उद्देश्य केवल तेजी से रन बनाना नहीं, बल्कि टीम को ऐसी स्थिति में पहुंचाना है, जहां अंतिम ओवरों में लक्ष्य हासिल करना आसान हो सके।
न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में तिलक ने अपनी इस भूमिका का अच्छा उदाहरण पेश किया था। भारतीय टीम 181 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही थी और मुकाबले में दबाव की स्थिति बनी हुई थी। ऐसे समय में तिलक ने नीतीश कुमार रेड्डी के साथ मिलकर पारी को संभाला। उन्होंने 26 गेंदों में नाबाद 51 रन बनाए। दोनों बल्लेबाजों के बीच हुई साझेदारी ने भारत को चार विकेट से जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
इस जीत के साथ भारतीय टीम ने पांच मैचों की टी20 सीरीज में 3-0 की अजेय बढ़त हासिल कर ली थी। तिलक की पारी ने यह भी दिखाया कि मध्यक्रम में उतरने के बावजूद वह तेजी से रन बनाने और जरूरत के समय पारी को संभालने की क्षमता रखते हैं।
तिलक ने अंतिम ओवरों में बल्लेबाजी के दौरान गेंदबाजों पर पड़ने वाले दबाव को भी अपनी रणनीति का हिस्सा बताया। उनके अनुसार, डेथ ओवर्स में गेंदबाज भी दबाव में रहता है। ऐसे में बल्लेबाज को सकारात्मक सोच के साथ खेलना चाहिए और गेंदबाज की गलती का फायदा उठाने की कोशिश करनी चाहिए।
नीतीश रेड्डी के साथ साझेदारी के दौरान तिलक ने अपने साथी खिलाड़ी से मुकाबले को आखिरी तक ले जाने और क्रीज पर टिके रहने की बात कही थी। उनका मानना था कि यदि दोनों बल्लेबाज मैदान पर बने रहते हैं तो भारत के लिए जीत की संभावना मजबूत हो सकती है।
न्यूजीलैंड के खिलाफ सीरीज में भारतीय टीम पहले ही अजेय बढ़त बना चुकी थी। अब उसकी कोशिश बाकी मुकाबले जीतकर सीरीज को 5-0 से समाप्त करने की थी। वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू सीरीज के तुरंत बाद न्यूजीलैंड पहुंचने के कारण खिलाड़ियों को अलग परिस्थितियों और समय क्षेत्र के अनुरूप खुद को ढालना पड़ा। तिलक ने व्यस्त कार्यक्रम को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का हिस्सा बताते हुए टीम की तैयारियों और प्रदर्शन पर ध्यान देने की बात कही।
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