
नई दिल्ली ।ज्येष्ठ मास (Jyeshtha Month) के मंगलवारों को उत्तर भारत में विशेष धार्मिक महत्व प्राप्त है। इन्हें बड़ा मंगल (Bada Mangal) या बुढ़वा मंगल के नाम से जाना जाता है। इस वर्ष अधिकमास के कारण ज्येष्ठ माह में बड़े मंगलों की संख्या बढ़ गई है और मंगलवार को इस श्रृंखला का सातवां बड़ा मंगल मनाया जा रहा है। इस अवसर पर देश के विभिन्न हिस्सों, विशेषकर उत्तर भारत में हनुमान मंदिरों (Hanuman Temples) में विशेष पूजा-अर्चना, सुंदरकांड पाठ (Sundarkand Recitation), भजन-कीर्तन और भंडारों (Community Feasts) का आयोजन किया जा रहा है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बड़ा मंगल का दिन भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। श्रद्धालु इस दिन व्रत रखकर विधि-विधान से पूजा करते हैं और बजरंगबली को उनकी प्रिय वस्तुएं अर्पित करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं तथा साहस, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
ज्योतिषीय दृष्टि से भी बड़ा मंगल का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन की गई पूजा से मंगल ग्रह की स्थिति को मजबूत करने में सहायता मिलती है। साथ ही शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से जुड़े कष्टों में भी राहत मिलने की मान्यता है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस अवसर पर मंदिरों में पहुंचकर पूजा-अर्चना करते हैं और हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार मंगलवार प्रातःकाल से ही पूजा-अर्चना का क्रम शुरू हो जाता है। श्रद्धालु स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर हनुमान मंदिरों में दर्शन करते हैं। दिनभर भजन, कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होता है, जबकि शाम के समय विशेष आरती का महत्व माना जाता है। कई स्थानों पर श्रद्धालु राहगीरों को शरबत, जल और प्रसाद वितरित कर सेवा कार्यों में भी भाग लेते हैं।
मान्यता है कि बड़ा मंगल के दिन भगवान हनुमान को लाल रंग विशेष रूप से प्रिय होता है। इसलिए भक्त उन्हें लाल फूल, विशेषकर गुड़हल अर्पित करते हैं। इसके अलावा केसरिया सिंदूर और चमेली के तेल से चोला चढ़ाने की परंपरा भी प्रचलित है। धार्मिक विश्वास के अनुसार यह पूजा श्रद्धालुओं के जीवन में आने वाली कठिनाइयों को कम करने में सहायक मानी जाती है।
हनुमान जी को मीठा पान अर्पित करने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है। श्रद्धालु गुलकंद, सौंफ और इलायची युक्त पान का भोग लगाते हैं। इसके साथ ही बूंदी, बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू तथा गुड़-चने का प्रसाद भी अर्पित किया जाता है। इन भोगों को बजरंगबली का प्रिय माना जाता है और इन्हें श्रद्धा भाव से अर्पित करना शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं में आटे, घी और गुड़ से बने चूरमा, मीठी रोटी अथवा केले के भोग का भी विशेष महत्व बताया गया है। भक्त अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार इन वस्तुओं का भोग लगाकर सुख, समृद्धि और मंगलकामना की प्रार्थना करते हैं। बड़े मंगल का यह पर्व केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, दान और सामाजिक सद्भाव का संदेश भी देता है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा, सेवा और भक्ति के साथ किए गए पूजन से भगवान हनुमान की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की अनेक परेशानियों से राहत मिलती है। इसी आस्था के साथ मंगलवार को मंदिरों और धार्मिक स्थलों पर भक्तों की विशेष भीड़ देखने को मिल रही है।
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