
जबलपुर। शहर के बाहरी इलाके में आकार ले रहे 113.925 किलोमीटर लंबे रिंग रोड पर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने टोल प्लाजा की संख्या घटाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। पहले यहां 3 नाके प्रस्तावित थे, जिससे जेब पर भारी बोझ पडऩे की आशंका थी, लेकिन अब केवल 2 टैक्स प्लाजा ही स्थापित होंगे। इनमें से पहला सालाबाड़ा में और दूसरा कुशनेर के छतरपुर गांव में बनेगा। इस नए फैसले से इस मार्ग से निकलने वाले मुसाफिरों को सीधी वित्तीय राहत मिलेगी। परियोजना का काम फिलहाल मंद गति से चल रहा है और अब तक लगभग 70 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। एनएचएआई ने दिसंबर 2027 तक पूरा निर्माण समाप्त कर इस पर विधिवत गाडिय़ां दौड़ाने का लक्ष्य तय किया है। साथ ही यह रिंग रोड एनएच-30 कटनी-सिहोरा मार्ग, एनएच-34 दमोह मार्ग, एनएच-45 भोपाल-शाहपुरा मार्ग और लखनादौन-नागपुर राजमार्ग को आपस में सहजता से जोड़ेगा। आसपास के पुराने टोल केंद्र पूर्ववत काम करते रहेंगे।
घटेगी वाहनों की भीड़,सुगम होगा सफर
रिंग रोड का पूरा काम समाप्त होते ही जबलपुर शहर की आंतरिक सड़कों पर ट्रैफिक दबाव में लगभग 40 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज होगी। भारी वाहन, ट्रक और लंबी दूरी की बसें नगर सीमा में घुसे बिना सीधे आउटर से अपने गंतव्य की ओर निकल सकेंगी। पांच महत्वपूर्ण हाईवे कनेक्टिविटी प्वाइंट विकसित होने से अंतरराज्यीय परिवहन बेहद तीव्र और सुरक्षित बन जाएगा। जाम और प्रदूषण से शहरवासियों को रोजमर्रा के स्तर पर बड़ी मुक्ति मिलेगी।
कारोबार और लॉजिस्टिक्स को मिलेगी नई रफ्तार
इस विशाल कॉरिडोर के पूरी तरह सक्रिय होते ही बरेला, मानेगांव, कुशनेर और अमझर जैसे ग्रामीण व उपनगरीय अंचलों में आर्थिक गतिविधियों को अप्रत्याशित पंख लगेंगे। आउटर इलाकों में आधुनिक लॉजिस्टिक्स पार्क, बड़े वेयरहाउस और नए व्यावसायिक केंद्र तेजी से उभरेंगे। स्थानीय जमीन और कारोबार को सीधा संबल मिलने से क्षेत्रीय युवाओं के लिए रोजगार और व्यापार के ढेरों नए द्वार खुलेंगे।
पांच चरणों में बंटकर चल रहा निर्माण कार्य
सड़क परियोजना को कुल 5 अलग-अलग पैकेजों में विभक्त कर तैयार किया जा रहा है। पैकेज 1 में बरेला से मानेगांव तक 16.15 किलोमीटर का हिस्सा शामिल है, जिसका दायित्व जे इन्फ्राटेक लिमिटेड संभाल रही है। पैकेज 2 के तहत मानेगांव से एनएच-45 तक 20.12 किलोमीटर सड़क तैयार हो रही है। पैकेज 3 में एनएच-45 से कुशनेर तक 35.82 किलोमीटर की दूरी कवर होगी। पैकेज 4 के तहत कुशनेर से अमझर तक 23.95 किलोमीटर मार्ग बनाया जा रहा है। अंतिम पैकेज 5 में अमझर से बरेला तक 17.87 किलोमीटर का दायरा सम्मिलित है। इस निर्माण चक्र में नर्मदा नदी पर एक भव्य केबल ब्रिज का ढांचा भी बड़ी तेजी से खड़ा किया जा रहा है।
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