नई दिल्ली। करवा चौथ का त्योहार (The festival of Karwa Chauth) देशभर में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं (Married women) पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करते हुए निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को चंद्रमा के दर्शन और पूजा के बाद व्रत खोला जाता है। हालांकि, त्योहार का उद्देश्य भले ही एक हो, लेकिन इसे मनाने की परंपराएं अलग-अलग राज्यों में अलग रूप में दिखाई देती हैं। कहीं व्रत की शुरुआत सरगी से होती है, तो कहीं करवा माता की पूजा, लोकगीतों और पारंपरिक रीति-रिवाजों का विशेष महत्व है।
पंजाब में करवा चौथ की शुरुआत सरगी की परंपरा से होती है। सूर्योदय से पहले सास अपनी बहू को सरगी देती है। इसमें फल, मिठाइयां, फेनी और सुहाग से जुड़ी वस्तुएं शामिल होती हैं। महिलाएं सरगी ग्रहण करने के बाद दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं।
यहां करवा चौथ केवल व्रत तक सीमित नहीं है, बल्कि पारिवारिक मेल-मिलाप का अवसर भी है। महिलाएं एक साथ बैठकर लोकगीत गाती हैं और करवा चौथ की कथा सुनती हैं। शाम को पारंपरिक पूजा के बाद चंद्रमा के दर्शन कर व्रत खोला जाता है।
कई क्षेत्रों में महिलाएं पूजा के दौरान एक-दूसरे के करवे बदलती हैं। इसे आपसी स्नेह, सौहार्द और सुहाग की मंगलकामना से जोड़कर देखा जाता है। शाम को महिलाएं एकत्र होकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं। मान्यता है कि कथा सुनने और विधि-विधान से पूजा करने के बाद ही व्रत की धार्मिक रस्में पूरी होती हैं।
राजस्थान में करवा चौथ का त्योहार पारंपरिक रीति-रिवाजों और सोलह शृंगार के साथ मनाया जाता है। महिलाएं रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान पहनती हैं, आभूषण धारण करती हैं और पूजा की थाली सजाती हैं।
राजस्थान के कुछ इलाकों में पूजा के दौरान घास या सींक से बनी विशेष तीलियों का इस्तेमाल करने की परंपरा भी बताई जाती है। महिलाएं करवा माता की पूजा कर पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। हालांकि, इन रीति-रिवाजों में क्षेत्र के अनुसार अंतर देखने को मिलता है।
महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में करवा चौथ उत्तर भारत की तरह व्यापक पारंपरिक त्योहार नहीं रहा है। इन क्षेत्रों में स्थानीय धार्मिक व्रतों और त्योहारों की अपनी अलग पहचान है। उदाहरण के लिए, महाराष्ट्र में मंगला गौरी व्रत का विशेष महत्व है, जबकि दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में विवाहित महिलाओं से जुड़े दूसरे व्रत प्रचलित हैं।
हालांकि, उत्तर भारतीय परिवारों और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रभाव से महाराष्ट्र तथा दक्षिण भारत के कुछ शहरों में भी करवा चौथ मनाने का चलन बढ़ा है। यहां रहने वाली कई महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं और भगवान शिव, माता पार्वती तथा भगवान गणेश की पूजा करती हैं। कुछ परिवारों में मिट्टी के करवे की पूजा भी की जाती है।
करवा चौथ की अलग-अलग परंपराएं भारतीय संस्कृति की विविधता को दर्शाती हैं। पंजाब की सरगी, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में करवा माता की पूजा तथा राजस्थान का पारंपरिक शृंगार इस त्योहार को अलग-अलग सांस्कृतिक रंग देते हैं।
क्षेत्र के अनुसार पूजा की विधि और रीति-रिवाज बदल सकते हैं, लेकिन इस पर्व का मूल भाव वैवाहिक जीवन में प्रेम, विश्वास और मंगलकामना से जुड़ा है। यही वजह है कि बदलते समय के बावजूद करवा चौथ का त्योहार अनेक परिवारों में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved