
डेस्क। ग्लोबल जियोपॉलिटिक्स और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार से इस समय की बड़ी खबर सामने आ रही है। लंबे समय से जारी भारी तनाव के बाद, अमेरिका और ईरान के बीच परदे के पीछे चल रही बातचीत आखिरकार रंग लाई है। ईरान के दावों के मुताबिक, अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री पर लगे कड़े प्रतिबंधों को पूरी तरह से हटा लिया है। इस फैसले के बाद कच्चे तेल के वैश्विक बाजार में एक बड़ा भूचाल आना तय माना जा रहा है, जो पूरी दुनिया के ऑयल गेम को हमेशा के लिए बदल कर रख सकता है।
बता दें कि हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप की एक तीखी टिप्पणी से नाराज होकर ईरान के टॉप डेलीगेट्स अचानक बातचीत की टेबल से उठकर चले गए थे। ऐसा लगा था कि अब दोनों देशों के बीच बातचीत पूरी तरह ठप हो जाएगी। लेकिन, इस भारी तनाव और वॉकआउट के बावजूद दोनों देशों की टेक्निकल टीमें बैक-चैनल से लगातार बातचीत करती रहीं। इसी का नतीजा है कि दोनों देशों के बीच एक बड़ा एमओयू (MOU) साइन हुआ है, जिसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।
प्रतिबंध हटते ही ईरान ने काफी आक्रामक तरीके से तेल बाजार में वापसी की है। ईरान की तरफ से किए गए दावे के मुताबिक, बैन हटने के महज एक हफ्ते के भीतर उसने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में 36 मिलियन बैरल कच्चे तेल की बंपर सप्लाई कर दी है। इतना ही नहीं, 36 मिलियन बैरल तेल की एक और बड़ी खेप अभी रास्ते में है, जो जल्द ही ग्लोबल मार्केट में पहुंचने वाली है।
अमेरिका से हुए इस समझौते के बाद केवल तेल की बिक्री ही शुरू नहीं हुई है, बल्कि ईरान की आर्थिक नाकेबंदी भी खत्म हो गई है। वैश्विक बैंकों में ईरान के जो खाते लंबे समय से फ्रीज पड़े थे, उन्हें फिर से पूरी तरह बहाल कर दिया गया है। इस एमओयू के बाद ईरान के खातों में बंद पड़ी एक बहुत बड़ी रकम उसे वापस मिल गई है, जिससे ईरान की डगमगाती अर्थव्यवस्था को एक नया जीवनदान मिला है।
इस पूरे समझौते का सबसे बड़ा और रणनीतिक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। दुनिया के इस सबसे संवेदनशील और मुख्य तेल सप्लाई रूट से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए अमेरिका और ईरान मिलकर एक नया सिस्टम तैयार करेंगे। इस नए सिस्टम के बनने से होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों पर होने वाले हमलों और टकरावों पर पूरी तरह लगाम लगेगी।
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