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US-वेनेजुएला युद्ध : ड्रग्स तो बहाना, असली मकसद तेल पर कब्‍जा करना ?

January 04, 2026

वाशिंगटन। दुनिया का ध्यान इस समय मध्य-पूर्व से हटकर अचानक लातिन अमेरिका (US) की ओर मुड़ गया है। अमेरिका ने शनिवार सुबह एक के बाद एक वेनेजुएला की राजधानी काराकस (US-Venezuela war) में भीषण हमले किए। कम ऊंचाई पर उड़ते कई अमेरिकी विमानों ने सैन्य सुविधाओं को निशाना बनाया। हमले से पहले पिछले 24 घंटों में अमेरिका ने वेनेजुएला के तट पर जो सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं, उसने एक पुराने सवाल को फिर से जिंदा कर दिया है: क्या अमेरिका वाकई ड्रग्स के खिलाफ लड़ रहा है, या उसकी नजर दुनिया के सबसे बड़े तेल खजाने पर है? आइए, इसे समझते हैं कि वेनेजुएला में अभी क्या हो रहा है और यह भारत सहित दुनिया के लिए चिंता का विषय क्यों है।



  • अभी क्या हो रहा है
    वेनेजुएला की राजधानी काराकस में कम ऊंचाई पर उड़ते कई विमानों और कम से कम सात विस्फोटों की आवाज सुनी गई। वेनेजुएला के सरकारी बयान में कहा गया कि अमेरिका ने काराकास के अलावा मिरांडा, अरागुआ और ला गुएरा राज्यों में नागरिक और सैन्य ठिकानों पर हमले किए। बयान में आरोप लगाया गया कि इन हमलों का एकमात्र उद्देश्य वेनेजुएला के तेल और खनिज संसाधनों पर कब्जा करना है। राष्ट्रपति निकोलस मदुरो ने बाहरी आक्रमण की स्थिति घोषित की है, जिससे उन्हें नागरिक अधिकारों को निलंबित करने और सशस्त्र बलों की भूमिका बढ़ाने का अधिकार मिल जाता है। सरकार ने अपने समर्थकों से सड़कों पर उतरकर साम्राज्यवादी हमले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने की अपील की है।

    स्थानीय निवासियों के मुताबिक, पहला धमाका रात करीब 2 बजे (स्थानीय समय) सुना गया। इसके बाद राजधानी और आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई। वेनेजुएला सरकार ने दावा किया है कि देश के तीन अलग-अलग क्षेत्रों में सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। सरकार ने सभी राजनीतिक और सामाजिक शक्तियों से अपील की है कि वे हमलों के खिलाफ एकजुट होकर देश की संप्रभुता की रक्षा करें।

    वहीं, वाइट हाउस की ओर से इस पूरे मामले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। हालांकि अमेरिकी मीडिया संस्था CBS News ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने कई दिन पहले ही हमले की अनुमति दे दी थी, लेकिन अन्य सैन्य अभियानों की प्राथमिकता और खराब मौसम के कारण कार्रवाई टाल दी गई। यह ट्रंप के वेनेजुएला विरोधी अभियान का अब तक का सबसे बड़ा और गंभीर सैन्य कदम माना जा रहा है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) और वाइट हाउस ने टिप्पणी के अनुरोधों का जवाब नहीं दिया। अमेरिकी संघीय उड्डयन प्रशासन (एफएए) ने धमाकों से कुछ घंटे पहले वेनेजुएला के हवाई क्षेत्र में अमेरिकी वाणिज्यिक और निजी विमानों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया।
    अमेरिका के भीतर उठ रहे सवाल

    अमेरिका के भीतर भी इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हवाई से डेमोक्रेटिक सीनेटर ब्रायन शाट्ज ने कहा कि अमेरिका का वेनेजुएला में ऐसा कोई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हित नहीं है जो युद्ध को जायज ठहराए। उन्होंने कहा- हमें अब तक यह सीख लेना चाहिए था कि किसी और मूर्खतापूर्ण सैन्य अभियान में बिना सोचे-समझे नहीं कूदना चाहिए। शैट्ज ने यह भी आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ट्रंप अमेरिकी जनता को यह बताने की भी जहमत नहीं उठा रहे हैं कि वास्तव में हो क्या रहा है।

    इस घटनाक्रम पर क्षेत्रीय प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा- वेनेजुएला पर हमला किया गया है। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने वेनेजुएला से सटी सीमाओं वाले शहरों में एक ऑपरेशनल प्लान सक्रिय कर दिया है। पेट्रो ने अमेरिकी राज्यों का संगठन और संयुक्त राष्ट्र से तत्काल बैठक बुलाने की भी मांग की है।

    जनवरी 2026 की शुरुआत वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही है।

    ऑपरेशन सदर्न स्पीयर: ताजा हमल से पहले ही अमेरिका ने कैरेबियन सागर में अपनी नौसेना की तैनाती बढ़ा दी थी। इसे आधिकारिक तौर पर ‘ड्रग कार्टेल’ के खिलाफ अभियान बताया जा रहा है।

    ड्रोन हमले और जब्ती: खबरों के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने वेनेजुएला के कुछ संदिग्ध ठिकानों और समुद्री जहाजों पर ड्रोन हमले किए हैं। अमेरिका का दावा है कि ये नार्को-टेररिस्ट (नशीले पदार्थों के तस्कर) के अड्डे थे।

    तेल टैंकरों पर कब्जा: अमेरिका ने वेनेजुएला से जुड़े तेल टैंकरों को भी जब्त करना शुरू कर दिया है, यह कहते हुए कि इनसे होने वाली कमाई मादुरो सरकार को मजबूत कर रही है।

    मादुरो ने इसे अवैध युद्ध कहा है, जबकि वाशिंगटन इसे अपनी सुरक्षा के लिए ज़रूरी कदम बता रहा है। अमेरिका का पक्ष: “मकसद ड्रग्स और तानाशाही खत्म करना है”
    अमेरिका की आधिकारिक कहानी क्या है?

    नार्को-स्टेट का आरोप: अमेरिका का आरोप है कि मादुरो सरकार ने वेनेजुएला को एक नार्को-स्टेट (तस्करों द्वारा चलाया जाने वाला देश) बना दिया है। अमेरिका का दावा है कि मादुरो के अधिकारी ड्रग कार्टेल्स के साथ मिलकर अमेरिका में कोकीन और अन्य नशीले पदार्थ भेज रहे हैं।

    लोकतंत्र की बहाली: 2024 के विवादित चुनावों के बाद से ही अमेरिका मादुरो को वैध राष्ट्रपति नहीं मानता। अमेरिका का कहना है कि वेनेजुएला की जनता त्रस्त है और वे वहां लोकतंत्र बहाल करना चाहते हैं।

    अमेरिकी नजरिए से, यह युद्ध तेल के लिए नहीं, बल्कि अपने नागरिकों को नशे से बचाने और एक तानाशाह को हटाने के लिए है।
    दूसरा पहलू: तेल का खजाना
    दुनिया का सबसे बड़ा खजाना: वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित तेल भंडार हैं- करीब 303 अरब बैरल। यह सऊदी अरब से भी ज्यादा है। लेकिन संकट और सैंक्शंस की वजह से उत्पादन बहुत कम हो गया है (करीब 9 लाख बैरल प्रतिदिन)। आज की ऊर्जा-भूखी दुनिया में, जिसके पास वेनेजुएला का तेल है, उसके पास बहुत बड़ी ताकत है।

    हेवी क्रूड की जरूरत: वेनेजुएला का तेल बहुत गाढ़ा होता है। अमेरिकी रिफाइनरियों को इसी तरह के तेल की खास जरूरत होती है। रूस और मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच, अमेरिका अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता।

    आर्थिक नाकाबंदी: अगर मकसद सिर्फ ड्रग्स रोकना होता, तो अमेरिका तेल टैंकरों को क्यों निशाना बनाता? तेल टैंकरों को रोकने का सीधा मतलब है मादुरो की कमाई का आखिरी जरिया बंद करना और वहां की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर लाना, ताकि वहां अमेरिका-समर्थित सरकार बन सके।

    हाल ही में मादुरो ने अमेरिका को तेल सौदों का प्रस्ताव देकर तनाव कम करने की कोशिश की है, जो यह साबित करता है कि लड़ाई की जड़ में तेल ही है।
    तेल की कीमतों में आग: अगर वेनेजुएला का तेल बाजार से पूरी तरह गायब हो गया या वहां लंबा गृहयुद्ध छिड़ गया, तो कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे देश, जो अपनी जरूरत का 80% तेल आयात करते हैं, उनके लिए पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है।

    शरणार्थी संकट: अमेरिकी प्रतिबंधों और हमलों से वेनेजुएला की आम जनता पिस रही है। लाखों लोग अपना घर छोड़कर पड़ोसी देशों और अमेरिका की ओर भाग रहे हैं। यह लातिन अमेरिका में एक बड़ा मानवीय संकट पैदा कर रहा है।

    रूस और चीन की एंट्री: वेनेजुएला के रूस और चीन के साथ गहरे संबंध हैं। अगर अमेरिका वहां सीधे तौर पर घुसता है, तो रूस और चीन चुप नहीं बैठेंगे। यह संघर्ष ‘लोकल’ से ‘ग्लोबल’ बन सकता है, जिससे दुनिया एक बार फिर दो गुटों में बंट सकती है।

    असली मकसद क्या है?

    इतिहास गवाह है कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नैतिकता अक्सर हितों का मुखौटा होती है। इसमें कोई शक नहीं कि वेनेजुएला में मादुरो का शासन निरंकुश है और वहां ड्रग्स की समस्या है। लेकिन यह भी उतना ही सच है कि अगर वेनेजुएला के पास तेल के बजाय सिर्फ ‘केले’ या ‘कॉफी’ होती, तो शायद अमेरिका इतनी बड़ी नौसेना वहां नहीं भेजता।

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