
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विजय और रश्मिका की टीम के एक प्रतिनिधि ने पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सोशल मीडिया पर गलत स्क्रीनशॉट और भ्रामक दावों के जरिए दोनों कलाकारों की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। टीम ने कथित पेड कैंपेन की आशंका का भी जिक्र किया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस की जांच के नतीजे सामने आना अभी बाकी है।
विजय और रश्मिका की टीम ने स्पष्ट किया है कि उन्हें लोगों के अपनी राय रखने के अधिकार से कोई परेशानी नहीं है। टीम का कहना है कि हर व्यक्ति को किसी विषय पर अपनी बात रखने की स्वतंत्रता है और वे इसका सम्मान करते हैं। लेकिन अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल किसी के खिलाफ झूठी जानकारी फैलाने या गलत तथ्यों को सच बताकर पेश करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। टीम के मुताबिक किसी भी कलाकार के निजी जीवन को लेकर अपुष्ट दावों को वायरल करना उचित नहीं है। इसी आधार पर कथित तौर पर भ्रामक सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
दरअसल विजय देवरकोंडा और रश्मिका मंदाना हाल ही में कॉफी विद करण के सीजन 9 में नजर आए थे। इस दौरान दोनों ने अपने रिश्ते और शादी को लेकर कई दिलचस्प बातें साझा कीं। बातचीत के दौरान रश्मिका ने बताया कि उन्होंने विजय को शादी के लिए मनाने की कोशिश की थी। वहीं विजय ने मजाकिया अंदाज में कहा कि बात शादी तक पहुंचने में कई बार प्रस्ताव देने की भूमिका रही। शो में दोनों की बातचीत और उनके निजी रिश्ते से जुड़ी टिप्पणियां सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गईं। इसके बाद कुछ यूजर्स ने विजय को लेकर नकारात्मक टिप्पणियां कीं और उनके रिश्ते पर मीम्स भी बनाए।
इस पूरे विवाद के बीच विजय देवरकोंडा ने सोशल मीडिया पर रश्मिका के साथ तस्वीरें और वीडियो साझा कर अपने रिश्ते को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने रश्मिका को अपनी सबसे प्यारी दोस्त पत्नी और जीवनसाथी बताते हुए कहा कि वह उन्हें अपनी जिंदगी का बेहद खूबसूरत हिस्सा मानते हैं। विजय ने यह भी लिखा कि कुछ लोगों को उनके रिश्ते से परेशानी हो सकती है लेकिन वे दोनों अपनी जिंदगी में खुश हैं। उनके इस संदेश को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग के बीच एक स्पष्ट जवाब के तौर पर देखा गया।
रश्मिका मंदाना ने भी इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी। उनकी पोस्ट के बाद प्रशंसकों के बीच चर्चा और तेज हो गई। दोनों कलाकारों के समर्थकों ने ऑनलाइन उत्पीड़न और निजी जिंदगी में अनावश्यक दखल के खिलाफ आवाज उठाई है। वहीं इस घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि सोशल मीडिया पर आलोचना और किसी के खिलाफ जानबूझकर गलत जानकारी फैलाने के बीच अंतर कैसे तय किया जाए।
फिलहाल इस मामले में साइबर पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। शिकायत दर्ज होने का अर्थ यह नहीं है कि लगाए गए सभी आरोप साबित हो गए हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित भ्रामक पोस्ट के पीछे कौन लोग हैं और क्या किसी संगठित अभियान के तहत ऐसी सामग्री फैलाई गई थी।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved