
डेस्क। पश्चिम एशिया के मौजूदा हालातों को ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र (UN) ने 2026 के लिए भारत की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 6.6 प्रतिशत से घटाकर 6.4 प्रतिशत कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (UN DESA) द्वारा मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब भी सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया कि पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक और झटका दिया है जिससे वृद्धि धीमी हुई है, मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा है और अनिश्चितता उत्पन्न हुई है। UN DESA के आर्थिक विश्लेषण और नीति प्रभाग के वैश्विक आर्थिक निगरानी शाखा के वरिष्ठ अर्थशास्त्री और प्रभारी अधिकारी इंगो पिटरले ने कहा कि भारत वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से ”अछूता नहीं” है।
इंगो पिटरले ने कहा, ”भारत ऊर्जा का बड़ा आयातक है और अन्य माध्यमों जैसे धन प्रेषण (रेमिटेंस) के प्रति भी संवेदनशील है, जिससे कुछ परेशानियां बढ़ती हैं। इसके साथ ही, वैश्विक वित्तीय सख्ती मौद्रिक नीति को और जटिल बना देगी।” पिटरले ने बताया कि पश्चिम एशिया का ”झटका” सभी देशों की वृद्धि पर दोहरा प्रभाव डाल रहा है। ये वृद्धि को तो कम कर ही रहा है, इसके साथ ही महंगाई को भी बढ़ा रहा है, जिससे नीतिगत गुंजाइश सीमित हो रही है। उन्होंने कहा, ” ये भारत के मामले में भी होगा। सवाल ये है कि केंद्रीय बैंक और वित्तीय प्राधिकरण इसका जवाब कैसे देंगे?”
रिपोर्ट में हालांकि कहा गया कि भारत अब भी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा और उत्पादन के 6.4 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि ये 2025 के 7.5 प्रतिशत से काफी कम है जो ”ऊर्जा आयात लागत में वृद्धि और कड़े वित्तीय हालात के दबाव” को दर्शाता है। पिटरले ने कहा, ”भारत में संरचनात्मक रूप से बहुत मजबूत वृद्धि देखी गई है जो उपभोक्ता मांग, सार्वजनिक निवेश और सेवा निर्यात के मजबूत प्रदर्शन से प्रेरित रही है। ये प्रमुख कारक बड़े पैमाने पर बने रहेंगे, इसलिए भारत स्पष्ट रूप से दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा।”
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2027 में देश की वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत हो सकती है। भारत की वृद्धि के अनुमान पर पूछे गए सवाल के जवाब में UN DESA के आर्थिक विश्लेषण और नीति प्रभाग के निदेशक शांतनु मुखर्जी ने कहा कि जो देश निर्यात पर निर्भर हैं, उनके लिए ये ध्यान रखना जरूरी है कि जब आयात लागत बढ़ती है, तो निर्यात भी प्रभावित हो सकता है। रिपोर्ट में 2026 में वैश्विक जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) का वृद्धि अनुमान अब 2.5 प्रतिशत लगाया गया है। ये जनवरी के अनुमान से 0.2 प्रतिशत कम है।
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