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सुलतानपुर से भिवंडी तक कोर्ट में पेशी: किन बयानों ने बढ़ाई राहुल गांधी की कानूनी मुश्किलें

February 22, 2026

नई दिल्ली। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) हाल के दिनों में लगातार अदालतों में पेशी (Court Appearances) को लेकर चर्चा में हैं। दो अलग-अलग राज्यों में दर्ज मानहानि के मामलों में उन्हें उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर और महाराष्ट्र के भिवंडी (Sultanpur and Bhiwandi in Maharashtra) की अदालतों का रुख करना पड़ा। ये दोनों मामले नए नहीं, बल्कि कई साल पुराने राजनीतिक बयानों से जुड़े हैं, जिनकी सुनवाई अब तेज हो गई है।

सुलतानपुर मामला: 2018 की टिप्पणी पर सुनवाई

सुलतानपुर की MP/MLA कोर्ट में राहुल गांधी शुक्रवार को पेश हुए। यह केस वर्ष 2018 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए एक बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लेकर टिप्पणी की थी।

इस बयान को मानहानिकारक बताते हुए भाजपा से जुड़े एक स्थानीय नेता ने मुकदमा दर्ज कराया था। अदालत के निर्देश पर राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ा। उन्होंने आरोपों से इनकार करते हुए इसे राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया। मामले की अगली सुनवाई अब तय तारीख पर होगी।



  • भिवंडी मामला: 2014 का बयान बना वजह

    अगले ही दिन राहुल गांधी भिवंडी की अदालत में पेश हुए। यह मामला 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए उस बयान से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को लेकर टिप्पणी की थी।

    इस मामले में शिकायत एक स्थानीय कार्यकर्ता ने दर्ज कराई थी। हाल ही में उनके पुराने जमानतदार के निधन के बाद नया जमानतदार पेश करना कानूनी रूप से आवश्यक था, जिसके चलते राहुल गांधी को अदालत में उपस्थित होना पड़ा।

    पुराने केस, अब तेज हुई सुनवाई

    दोनों मामले क्रमशः 2014 और 2018 के हैं, लेकिन न्यायिक प्रक्रिया में लंबित रहने के बाद अब उनकी सुनवाई तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी कारण राहुल गांधी को लगातार अदालतों में पेश होना पड़ रहा है।

    इन पेशियों ने राजनीतिक बयानबाजी और उसकी कानूनी सीमाओं को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

    राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज

    इन घटनाओं पर राजनीतिक माहौल भी गर्माया हुआ है। भारतीय जनता पार्टी इसे कानून की सामान्य प्रक्रिया बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई करार दे रही है। अदालत परिसरों के बाहर विरोध-प्रदर्शन और बयानबाजी भी देखने को मिली।

    आगे क्या होगा?

    अब दोनों मामलों में आगे की सुनवाई के दौरान राहुल गांधी या उनके वकीलों को अदालत में अपना पक्ष रखना होगा। यदि अदालत आरोप तय करती है, तो मुकदमे ट्रायल के चरण में प्रवेश कर सकते हैं। फिलहाल दोनों प्रकरण न्यायिक प्रक्रिया के तहत लंबित हैं और कानूनी रूप से आगे बढ़ रहे हैं।

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