हैदराबाद। AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) ने प्रधानमंत्री (Narendra Modi) पर अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर किए गए हमले को लेकर तीखा हमला बोला है। ओवैसी ने कहा कि भारत को इस हमले की स्पष्ट रूप से निंदा करनी चाहिए थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने ऐसा नहीं किया।
हैदराबाद की मक्का मस्जिद में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian से फोन पर बातचीत की, लेकिन यह चर्चा केवल गैस और पेट्रोल के मुद्दे तक सीमित रही। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को अपना “56 इंच का सीना” तो याद आ गया, लेकिन ईरान पर हुए हमले की निंदा करना उन्हें याद नहीं रहा।
भारत की पारंपरिक नीति का हवाला
ओवैसी ने कहा कि भारत लंबे समय से इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे पर संतुलित और तटस्थ नीति अपनाता रहा है, लेकिन मौजूदा सरकार इस परंपरा से हटती नजर आ रही है। उन्होंने कहा कि भारत को दोहा, दुबई, बहरीन और कुवैत में हुई घटनाओं के साथ-साथ ईरान पर हुए हमले की भी खुलकर आलोचना करनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu के साथ खड़े होने के बजाय अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहिए।
‘इस्लाम मानने वालों को बांटने की साजिश’
ओवैसी ने आरोप लगाया कि ईरान पर हमला इस्लाम मानने वालों को बांटने की साजिश का हिस्सा है। उन्होंने दावा किया कि हमलों की शुरुआत से दो दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी इजरायल गए थे और यह दौरा ऐसे समय हुआ जब नेतन्याहू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गए थे।
सभा में ओवैसी ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का भी विरोध किया। उनका कहना था कि हिंदू कानून को मुसलमानों पर नहीं थोपा जा सकता। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती हिंसा और नफरत की घटनाओं पर भी चिंता जताई।
ओवैसी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की संसदीय सीट वाराणसी में मुसलमानों के घरों को तोड़ा गया है। साथ ही उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर हुए हमले की निंदा करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी राजनीतिक नेता पर हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता और ऐसे मामलों की कड़ी निंदा होनी चाहिए।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved