
नई दिल्ली। नवरात्र (Navaratri) के पावन पर्व पर व्रत (Fast) रखने वाले श्रद्धालु अपनी परंपराओं के अनुसार भोजन का विशेष ध्यान रखते हैं। इस दौरान कुछ लोग फलाहार व्रत रखते हैं, जबकि कुछ दिनभर व्रत रखकर शाम की पूजा के बाद भोजन करते हैं। इस नियम के अनुसार नवरात्र में साधारण या सफेद नमक (White salt) का उपयोग करना वर्जित माना जाता है। इसका मुख्य कारण यह है कि सफेद नमक कई मशीनी और रासायनिक प्रक्रियाओं से गुजरता है, इसलिए इसे व्रत के लिए शुद्ध नहीं माना जाता।
सेंधा नमक का महत्व
वहीं, सेंधा नमक पूरी तरह प्राकृतिक होता है और इसे हिमालय की चट्टानों से निकाला जाता है। इसे ‘शुद्ध नमक’ मानकर व्रत के भोजन में उपयोग किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत का अर्थ सिर्फ भोजन पर संयम नहीं, बल्कि मन को भगवान की भक्ति में लगाना और सात्विक जीवन जीना भी है। साधारण नमक कृत्रिम माना गया है, जबकि सेंधा नमक को ‘स्वयं सिद्ध’ और सात्विक माना जाता है। आयुर्वेद के अनुसार, सेंधा नमक शरीर को शीतलता प्रदान करता है और मन को शांत रखता है। व्रत में ध्यान और पूजा-पाठ करने के लिए शरीर का सात्विक होना आवश्यक होता है और इसके लिए सेंधा नमक भोजन में अहम भूमिका निभाता है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से सेंधा नमक
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो व्रत के दौरान अनाज या सामान्य भोजन न करने से शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। सेंधा नमक में मैग्नीशियम, पोटेशियम और कैल्शियम जैसे मिनरल्स मौजूद होते हैं, जो ब्लड प्रेशर को संतुलित रखते हैं और पाचन क्रिया को दुरुस्त करते हैं। इसलिए व्रत के भोजन में सेंधा नमक का उपयोग स्वास्थ्य और भक्ति दोनों दृष्टियों से लाभकारी माना जाता है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि नमक का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए।
(Disclaimer : यह खबर केवल जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से लिखी गई है। इसमें दी गई जानकारी सामान्य स्रोतों पर आधारित है और हम इसकी पुष्टि नहीं करते हैं।)
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