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माफिया Mukhtar Ansari को यूपी लाने Yogi सरकार ने झोंकी ताकत, जानें क्‍यों?

March 27, 2021

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल के माफिया डॉन और बीएसपी विधायक मुख्तार अंसारी (Mafia MLA Mukhtar Ansari) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से तगड़ा झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने माफिया डॉन मुख्तार अंसारी को यूपी लाने के लिए प्रयागराज (Prayagraj) की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट (MP/MLA Special Court) में दो हफ्ते निर्णय लेने का आदेश दिया है. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बांदा जेल अधीक्षक (Banda Jail Superintendent) को भी मुख्तार अंसारी को जेल में रखे जाने को लेकर तैयारी करने को कहा है. दरअसल बांदा जेल (Banda Jail) से ही मुख्तार अंसारी को पंजाब की रोपड़ जेल (Punjab’s Ropar Jail) में शिफ्ट किया गया था. हालांकि यूपी में पहले बांदा जेल लाये जाने के बाद मुख्तार अंसारी को किस जेल रखना है? ये प्रयागराज की एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट तय करेगी.



  • मुख़्तार के खिलाफ प्रयागराज की एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट (MP/MLA Special Court) में कुल 19 मुक़दमे लम्बित हैं. इनमे से डबल मर्डर का एक मामला फाइनल स्टेज पर है, जिसका ट्रायल लगभग पूरा हो चुका है और कभी भी फैसला आ सकता है. इसके अलावा बाकी 9 मुकदमों में 6 में इन दिनों गवाही के साथ ट्रायल चल रहा है. बाकी तीन मुकदमों में अभी अदालत ने मुख्तार पर चार्ज फ्रेम यानी आरोप तय नहीं किये हैं.
    दस मुकदमों में से अकेले चार गैंगस्टर के हैं. गैंगस्टर के तीन मुक़दमे गाज़ीपुर जिले के हैं, जबकि एक मऊ जिले का है. इसके अलावा मुख़्तार पर हत्या और जानलेवा हमले के भी मुक़दमे चल रहे हैं. मऊ जिले के दक्षिण टोला थाने में दर्ज एफआईआर में तो मुख़्तार को उम्र कैद से लेकर फांसी तक की सज़ा हो सकती है. एमपी एमएलए कोर्ट में मुख्तार के खिलाफ दस मुक़दमे चल रहे हैं तो एक मुकदमा खुद मुख्तार ने वारणासी जेल में बंद माफिया बृजेश सिंह के खिलाफ दाखिल कर रखा है. मुख़्तार ने इस मामले में गवाही शुरू कराने के लिए फरवरी महीने में कोर्ट से गुहार भी लगाई है. 20 साल पुराने इस मुक़दमे में ट्रायल फिलहाल रुका हुआ है. बाहुबली मुख्तार के खिलाफ एक चर्चित मुकदमा फर्जी तरीके से शस्त्र लाइसेंस हासिल करने का भी है.
    यूपी सरकार की दिलचस्पी मुख़्तार के उन्हीं दस मुकदमों में है, जो उसके खिलाफ चल रहे हैं. सरकार की मंशा इन मामलों में मजबूत पैरवी कर मुख्तार को सज़ा दिलाने की है. ऐसा करके सरकार जहां एक तरफ क़ानून का राज स्थापित होने का संदेश देना चाहती है तो वहीं दूसरी तरफ कुछ मामलों में बाहुबली को सज़ा दिलाकर उसके सियासी कैरियर को भी समाप्त करने की भी तैयारी में है, अगर मुख्तार को किसी मामले में सज़ा हो जाती है तो चुनाव आयोग के नए नियमों के मुताबिक़ वह चुनाव नहीं लड़ सकेगा.
    प्रयागराज की एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट में मुख्तार के मामलों में राज्य सरकार की ओर से पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी गुलाब चंद अग्रहरि के मुताबिक़ सरकार की मंशा के मुताबिक़ मुकदमों में तेजी लाने और मजबूती से पक्ष रखने के लिए ठोस कवायद की जा रही है. उनके मुताबिक़ मुख्तार के पंजाब जेल में होने और इलाहाबाद की कोर्ट में पेश न होने से कुछ मामलों में कानूनी पेचीदगियां ज़रूर सामने आ रही हैं, लेकिन बाकी मामलों में मजबूत पैरवी के ज़रिये बाहुबली को सज़ा दिलाने के पुख्ता इंतजाम किये गए हैं. उन्होंने कहा कि मुख्तार अंसारी को यूपी लाये जाने के बाद कानूनी अड़चने भी खत्म हो जायेंगी और मुकदमों के निस्तारण में तेजी आयेगी.
    वहीं क्रिमिनल मामलों के जानकार अधिवक्ता एस.ए.नसीम के मुताबिक एमपी एमएलए स्पेशल कोर्ट में मुख्तार अंसारी के खिलाफ जो भी मामले हैं, उसमें उसे उम्र कैद से लेकर फांसी तक की सज़ा भी हो सकती है. उनका कहना है कि मुख्तार को कुछ मामलों में सज़ा होने का एहसास भी है और इसी वजह से वह यूपी आने से बच रहा है. उनके मुताबिक़ यहां के किसी भी मामले में मुख्तार पर सीधे तौर पर हत्या के मामले में शामिल होने का आरोप नहीं है. ऐसे में सिर्फ साजिश रचने के आरोप में दोषी होने पर उसे अधिकतम उम्र कैद की ही सज़ा होने की ज़्यादा उम्मीद है.

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