
मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों यह चर्चा तेज है कि क्या शरद पवार के नेतृत्व वाली नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) का कांग्रेस में विलय हो सकता है। इस मुद्दे ने महाविकास आघाड़ी और महायुति दोनों खेमों में राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इस अटकल को सबसे पहले शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने हवा दी। उन्होंने कहा कि भाजपा को चुनौती देने के लिए कांग्रेस से निकले क्षेत्रीय दलों को फिर से कांग्रेस के साथ आ जाना चाहिए और शरद पवार को इस प्रक्रिया में नेतृत्व करना चाहिए।
संजय राउत ने कहा- “मजबूत कांग्रेस, अखंड कांग्रेस, एक प्रबल विकल्प के रूप में देश के भीतर खड़ी रहनी चाहिए। पवार साहब को इस संदर्भ में आगे आना चाहिए (पहल करनी चाहिए)। माननीय शरद पवार जी, यह जो विचारधारा या भूमिका बन रही है, एक साथ आने की, उस संदर्भ में अगर उन्होंने नेतृत्व किया, आगे आए (पहल की) तो यह विचार बहुत आगे जाएगा।”
संजय राउत ने कहा- “मेरा ऐसा कहना है कि कांग्रेस की विचारधारा से जो दल बाहर निकले, कुछ कारणों से, आज वे कांग्रेस के विचार पर काम कर ही रहे हैं। सरकार में होते हैं, अनेक प्रवाहों में एक साथ हैं तो यह विचार अगर एक साथ आया सारा, तो मोदी सरकार के सामने एक बहुत बड़ा विकल्प (चुनौती) खड़ा किया जा सकता है।”
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस की ओर से भी इस चर्चा को पूरी तरह खारिज नहीं किया गया। महाराष्ट्र कांग्रेस नेता नाना पटोले ने दावा किया कि एनसीपी के कांग्रेस में विलय का विचार नया नहीं है और यह प्रस्ताव पहले भी सामने आया था। वहीं कांग्रेस के कुछ नेताओं ने विपक्षी दलों की एकजुटता की जरूरत पर जोर दिया है। नाना पटोले ने कहा कि यह समझ अब विभिन्न राज्यों के क्षेत्रीय दलों में भी विकसित हो गई है। चाहे ममता बनर्जी हों, शरद पवार हों या धर्मनिरपेक्ष राजनीति का प्रतिनिधित्व करने वाले अन्य दल, सभी को लगता है कि देश को बचाने के लिए उन्हें कांग्रेस के साथ आना चाहिए। यही प्रक्रिया अब शुरू हो चुकी है।
एनसीपी (शरद पवार) क्या बोली?
दूसरी ओर, एनसीपी (शरद पवार) ने फिलहाल किसी औपचारिक विलय प्रस्ताव से इनकार किया है। पार्टी के नेताओं ने कहा है कि ऐसी कोई चर्चा आधिकारिक तौर पर नहीं हुई है, हालांकि रोहित पवार और सुप्रिया सुले के बयानों से यह संकेत मिला है कि विपक्षी एकता के सवाल पर सभी विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। कांग्रेस में एनसीपी के विलय के सुझाव पर सुप्रिया सुले ने कहा- “संजय राउत जी मेरे लिए बड़े भाई जैसे हैं, उन्होंने एक अच्छा सुझाव दिया है। पता नहीं होगा नहीं होगा।” वहीं, रोहित पवार ने कहा- “जब होगा तब होगा। हो भी सकता है, नहीं भी हो सकता है। लेकिन सबसे पहले जरूरी यह है कि सभी विपक्षी दल एक साथ आएं और मोदी सरकार के खिलाफ मजबूती से खड़े रहें।”
सीएम फडणवीस क्या बोले?
इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तंज कसते हुए कहा कि क्षेत्रीय दल किसी “डूबते जहाज” जैसी कांग्रेस में विलय नहीं करेंगे। उनका दावा है कि यदि विपक्षी दल एकजुट भी हो जाएं तो भाजपा के विस्तार पर कोई असर नहीं पड़ेगा उल्टा बीजेपी को पॉलिटिकल स्पेस मिलेगा।
महाराष्ट्र की राजनीति में अटकलें और तेज
कुल मिलाकर, अभी तक कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) के विलय को लेकर कोई आधिकारिक फैसला या घोषणा नहीं हुई है। लेकिन संजय राउत के सुझाव, कांग्रेस नेताओं के सकारात्मक संकेत और रोहित पवार-सुप्रिया सुले की प्रतिक्रियाओं के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में इस मुद्दे पर अटकलें और तेज हो गई हैं।
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