
नई दिल्ली । चीन (China) के रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने देश के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है. मंत्रालय ने जनरल झांग योउशिया (General Zhang Youxia) पर जांच शुरू करने का ऐलान किया है. उन पर “अनुशासन और कानून के गंभीर उल्लंघन” के आरोप लगाए गए हैं. चीन में इस तरह की भाषा आमतौर पर भ्रष्टाचार (Corruption) से जुड़े मामलों में इस्तेमाल होती है, हालांकि अभी आरोपों का पूरा ब्योरा नहीं दिया गया है.
इसी के साथ एक और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी जनरल लियू झेनली के खिलाफ भी जांच शुरू की गई है. यह कार्रवाई ऐसे वक्त हुई है जब पिछले साल अक्टूबर में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने सेना के 9 बड़े जनरलों को सस्पेंड कर दिया था. इसे कई दशकों में चीनी सेना के भीतर सबसे बड़ा सफाई अभियान माना जा रहा है.
75 साल के जनरल झांग योउशिया चीन की सबसे ताकतवर सैन्य संस्था सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के उपाध्यक्ष थे. यह संस्था सीधे राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नियंत्रण में काम करती है. झांग कम्युनिस्ट पार्टी के पोलितब्यूरो के सदस्य भी थे, जहां देश के सबसे बड़े फैसले लिए जाते हैं.
1968 से PLA जॉइन किया, शी के थे भरोसेमंद
झांग का पारिवारिक और सैन्य बैकग्राउंड काफी मजबूत रहा है. उनके पिता कम्युनिस्ट पार्टी के शुरुआती जनरलों में शामिल थे. झांग ने 1968 में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी जॉइन की थी और वे उन कुछ वरिष्ठ अधिकारियों में थे जिनके पास असली युद्ध का अनुभव था. तय उम्र से आगे भी उन्हें पद पर बनाए रखा गया था, जिसे अब तक शी जिनपिंग के भरोसे की निशानी माना जाता था.
200,000 कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई
पिछले कुछ समय से अटकलें तब तेज हुईं जब झांग और लियू दिसंबर में एक अहम पार्टी कार्यक्रम में नजर नहीं आए. इसके बाद उनके खिलाफ जांच की खबरों को बल मिला. राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सत्ता में आने के बाद से चीन में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान चल रहा है, जिसमें हाल के वर्षों में सेना पर खास ध्यान दिया गया है. सीएनएन की रिपोर्ट की मानें तो 2012 से अब तक 200,000 अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के लिए कार्रवाई क गई है.
शी के प्रति वफादार बनाने की रणननीति
शी जिनपिंग का कहना है कि भ्रष्टाचार पार्टी के लिए सबसे बड़ा खतरा है. हालांकि आलोचकों का मानना है कि यह अभियान सिर्फ सुधार के लिए नहीं, बल्कि सत्ता को मजबूत करने और विरोधियों को हटाने का जरिया भी है. विशेषज्ञों के मुताबिक यह कार्रवाई सेना को पूरी तरह अनुशासित और शी जिनपिंग के प्रति वफादार बनाने की रणनीति का हिस्सा है.
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