
नई दिल्ली। स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि सेंट्रल ड्रग्स लैबोरेटरीज ने मई के लिए अपनी मासिक ड्रग अलर्ट रिपोर्ट में अलग-अलग कंपनियों द्वारा बनाई गई 46 दवाओं के सैंपल को मानक गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाया। अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा राज्य स्तरीय दवा परीक्षण प्रयोगशालाओं ने 113 दवाओं के सैंपल को भी NSQ पाया है।
बता दें कि यह जानकारी नियमित निगरानी प्रक्रिया के तहत NSQ और नकली दवाओं की सूची हर महीने सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) के पोर्टल पर जारी की जाती है।
किसी दवा के सैंपल को NSQ तब माना जाता है, जब वह तय गुणवत्ता मानकों में से एक या अधिक परीक्षणों में फेल हो जाता है। हालांकि यह कमी केवल उस विशेष बैच तक सीमित होती है जिसकी जांच की गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि बाजार में उपलब्ध उसी दवा के सभी उत्पाद खराब हैं।
मई 2026 के दौरान असम से एक दवा के सैंपल को नकली पाया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस दवा को कुछ अनधिकृत निर्माताओं ने दूसरी कंपनी के ब्रांड नाम का इस्तेमाल करके तैयार किया था। अधिकारियों ने बताया कि इस पूरे मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद दोषियों के खिलाफ कानून और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि NSQ और नकली दवाओं की पहचान करने का यह अभियान राज्य नियामक संस्थाओं के साथ मिलकर नियमित रूप से चलाया जाता है, ताकि ऐसी दवाओं की पहचान कर उन्हें बाजार से हटाया जा सके और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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