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13 घंटे तक चली चीन के साथ 15वें दौर की वार्ता, भारत ने सैन्‍य गतिरोध के समाधान पर द‍िया जोर

नई दिल्ली: भारत और चीन ने शुक्रवार को पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) में टकराव (India China Border Dispute) वाले कुछ स्थानों पर 22 महीने से जारी गतिरोध को हल करने के लिए 15वें दौर की हाई लेवल सैन्य वार्ता (Corps Commander Level Talks) की. दोनों देश के बीच पूर्वी लद्दाख के चुशुल में कोर कमांडर स्तर की 15वीं वार्ता लगभग 13 घंटे तक चली और शुक्रवार रात 11 बजे समाप्त हुई. सेना के सूत्रों ने बताया है कि भारतीय पक्ष ने अप्रैल-मई 2020 में शुरू हुए सैन्य गतिरोध को दूर करने के लिए क्षेत्र में शेष घर्षण बिंदुओं के समाधान पर जोर दिया है. इससे दो महीने पहले हुई वार्ता में गतिरोध को हल करने में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई थी.

सूत्रों ने बताया कि कोर-कमांडर स्तर की वार्ता पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के भारतीय हिस्से में चुशुल-मोल्दो ‘बॉर्डर प्वाइंट’ पर सुबह 10 बजे शुरू हुई. यह पता चला है कि भारतीय पक्ष ने ‘देपसांग बल्ज’ और डेमचोक में मुद्दों को हल करने समेत टकराव वाले शेष स्थानों पर जल्द से जल्द सेना को हटाने पर जोर दिया. वार्ता के दौरान हॉट स्प्रिंग्स (पेट्रोलिंग प्वाइंट-15) क्षेत्रों में सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया.


12 जनवरी को हुई थी 14वें दौर की बातचीत
वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व लेह स्थित 14वीं कोर के नवनियुक्त कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने किया. भारत और चीन के बीच 14वें दौर की बातचीत 12 जनवरी को हुई थी और टकराव वाले शेष स्थानों गतिरोध का हल करने में कोई महत्वपूर्ण प्रगति नहीं हुई थी. वार्ता में चीनी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व दक्षिण शिनजियांग सैन्य जिले के कमांडर मेजर जनरल यांग लिन ने किया था.

दोनों पक्षों को स्वीकार्य विवादों के उचित समाधान की तलाश
दो सालों में 14 दौर की बातचीत के बाद चीनी विदेश मंत्रालय ने हाल ही में कहा कि दोनों पक्ष सीमा मुद्दों पर एक कदम आगे बढ़ा सकते हैं और समाधान तक पहुंच सकते हैं. दोनों पक्षों को स्वीकार्य विवादों के उचित समाधान की तलाश करनी चाहिए. पैंगोंग त्सो, गलवान और गोगरा के उत्तरी और दक्षिणी तटों पर डिसएंगेजमेंट किए जाने के बाद भारत महत्वपूर्ण पैट्रोलिंग पॉइंट-15 और हॉट स्प्रिंग्स में पीपी-17 और 17ए जैसे क्षेत्रों पर सैनिकों की वापसी पर जोर दे रहा है.

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