
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार के महत्वाकांक्षी सांदीपनि विद्यालय प्रोजेक्ट में सबसे बड़ी चुनौती अब स्कूल भवन, सुविधाएं या संसाधन नहीं, बल्कि स्थायी नेतृत्व की कमी बनती दिख रही है। प्रदेश में संचालित 275 सांदीपनि विद्यालयों में सिर्फ 66 में नियमित प्राचार्य पदस्थ हैं, जबकि 179 स्कूल प्रभारी प्राचार्यों के भरोसे चल रहे हैं। यानी प्रोजेक्ट के करीब 70 प्रतिशत स्कूलों में प्राचार्य का पद खाली है।
2022 में शुरू किए गए इन स्कूलों में सरकार ने शुरुआत में प्राचार्य और शिक्षकों का पूरा स्टाफ उपलब्ध कराया था। प्राचार्यों की पदस्थापना साक्षात्कार के जरिए और शिक्षकों की भर्ती लिखित परीक्षा व साक्षात्कार के माध्यम से की गई थी। लेकिन समय के साथ सेवानिवृत्ति और अन्य कारणों से पद खाली होते गए और नियमित व्यवस्था की जगह प्रभारियों ने ले ली।
राजधानी के सांदीपनि स्कूल में भी दो महीने से पद खाली
राजधानी का सांदीपनि विद्यालय महात्मा गांधी भी इससे अछूता नहीं है। यहां करीब दो महीने से प्राचार्य का पद खाली है। बर्रई के सांदीपनि विद्यालय में भी लगभग छह महीने से नियमित प्राचार्य नहीं है। प्राचार्य केवल शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन करने वाला पद नहीं है। स्कूल के प्रशासन, विकास कार्यों और शैक्षणिक व्यवस्था की निगरानी भी इसी स्तर से होती है। ऐसे में लंबे समय तक प्रभारी व्यवस्था रहने से इन स्कूलों की संचालन व्यवस्था प्रभावित होने की बात सामने आ रही है।
सामान्य स्कूल भी प्रभारी व्यवस्था में
समस्या केवल ड्रीम प्रोजेक्ट तक सीमित नहीं है। प्रदेश के करीब 3599 हायर सेकेंडरी स्कूलों में लगभग दो हजार प्राचार्य पद रिक्त हैं। इसी तरह 3833 हाई स्कूल प्राचार्य के स्वीकृत पदों में से 1712 पद खाली बताए गए हैं। इसके चलते बड़ी संख्या में सामान्य स्कूल भी प्रभारी व्यवस्था के तहत संचालित हो रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने पदोन्नति पर लगी रोक हटने के बाद प्राचार्यों की कमी दूर करने के लिए पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की। व्याख्याता से हाईस्कूल प्राचार्य पद पर 1079 और हाईस्कूल से हायर सेकेंडरी प्राचार्य पद पर 509 शिक्षकों को पदोन्नत किया गया। हायर सेकेंडरी प्राचार्यों के पदोन्नति आदेश 13 अगस्त को जारी हो चुके हैं, लेकिन पदस्थापना अब तक नहीं हुई है। विभाग ने पदोन्नत प्राचार्यों को उनकी मौजूदा पदस्थापना वाले स्कूल में ही प्राचार्य बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है, लेकिन उसे अभी मंजूरी नहीं मिली है। प्राचार्य पदों की पदस्थापना को लेकर विभागीय स्तर पर प्रक्रिया पहले भी हुई है। करीब तीन साल पहले प्राचार्यों से स्कूलों के विकल्प लिए गए थे, लेकिन सभी को विकल्प के आधार पर पदस्थापना नहीं मिल सकी। अब नई पदोन्नति के बाद विकल्प या काउंसलिंग के जरिए पोस्टिंग होगी या किसी अन्य तरीके से, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। शिक्षकों की मांग है कि पदोन्नति के बाद पदस्थापना की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी की जाए, ताकि नियमित प्राचार्यों की कमी दूर हो सके। लोक शिक्षण संचालनालय के अपर संचालक रवींद्र सिंह के अनुसार सांदीपनि विद्यालयों में प्राचार्यों और शिक्षकों की पदस्थापना की प्रक्रिया चल रही है और जल्द रिक्त पदों पर पदस्थापना पूरी की जाएगी।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved