img-fluid

इंजीनियरों की कमी, विकास ठप

November 05, 2026

  • अनुभवहीन अफसरों के भरोसे निगम के अहम विभाग
  • अरबों के प्रोजेक्ट फाइलों में उलझे, सड़क-नाली से लेकर पानी और रोशनी तक के काम प्रभावित, भोपाल को बार-बार पत्र लिखकर थका निगम, जवाब तक नहीं मिला

जबलपुर। शहर के विकास की कमान संभालने वाला नगर निगम खुद इंजीनियरों की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि सड़क, नाली, फुटपाथ, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था से जुड़े कामों की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। सीवर लाइन, अमृत 2.0, नदी-सरोवरों के जीर्णोद्धार और सामुदायिक भवनों से जुड़े प्रोजेक्ट भी अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं। विभागीय फाइलें मुख्यालय तक पहुंचती हैं, लेकिन निर्णय और स्वीकृति के इंतजार में कई-कई दिन अटकी रहती हैं। शहर के विकास से जुड़े अहम विभागों की जिम्मेदारी अनुभवी इंजीनियरों के बजाय ऐसे अधिकारियों के कंधों पर है, जिन्हें निगम की जटिल कार्यप्रणाली का पर्याप्त अनुभव अभी हासिल नहीं हुआ है।


  • नगर निगम के लोक निर्माण, जल, प्रकाश, नक्शा, कॉलोनी सेल, संपदा और संभागीय कार्यालयों में इंजीनियरों की कमी का असर साफ दिखाई दे रहा है। अधीक्षण यंत्री और कार्यपालन यंत्री स्तर के पदों पर लगातार रिक्तियां और जिम्मेदारियों में बदलाव होने से विभागीय कामकाज प्रभावित है। कई इंजीनियरों के पास एक से अधिक विभागों का प्रभार है। नतीजतन कार्यालयीन निर्णयों से लेकर निर्माण कार्यों की निगरानी तक प्रभावित हो रही है। सवाल यह है कि जब विभागों के पास पर्याप्त अनुभवी तकनीकी अधिकारी ही नहीं हैं, तो करोड़ों-अरबों के प्रोजेक्ट की गुणवत्ता और समय-सीमा की निगरानी कैसे होगी? सड़क और नाली निर्माण के साथ प्रकाश व्यवस्था की स्थिति भी कई क्षेत्रों में संतोषजनक नहीं है। कुछ स्थानों पर बिजली के खंभे तक नहीं लग पाए हैं। जिन कॉलोनियों को वैध किया जा चुका है, वहां सड़क, नाली और स्थायी बिजली व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं विकसित करने की जिम्मेदारी भी निगम के संबंधित विभागों पर है। इंजीनियरों की कमी बनी रही तो इन क्षेत्रों में सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रक्रिया और लंबी खिंच सकती है। विभागों में पदोन्नति के बाद इंजीनियरों को जिम्मेदारियां तो मिल रही हैं, लेकिन निगम की तकनीकी प्रक्रिया का पर्याप्त अनुभव हासिल करने से पहले ही उन्हें कई विभागों का काम सौंपा जा रहा है। इससे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच और फाइलों के निपटारे पर असर पडऩे की आशंका है।

    भोपाल को पत्र भेजे, जवाब का इंतजार भी खत्म
    इंजीनियरों की कमी दूर करने के लिए नगर निगम प्रशासन नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग, भोपाल को पत्राचार कर चुका है। निगमायुक्त स्तर से भी कई बार अनुभवी इंजीनियर उपलब्ध कराने और रिक्त पदों की समस्या दूर करने का अनुरोध किया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। हैरानी यह है कि पत्रों का जवाब नहीं मिलने के बाद भी उनकी स्थिति जानने के लिए प्रभावी पहल होती नहीं दिख रही। नतीजतन समस्या जस की तस बनी हुई है और शहर के जरूरी कामों का बोझ मौजूदा सीमित अमले पर बढ़ता जा रहा है।

    फाइलों में अटके प्रोजेक्ट, जमीन पर अधूरे काम
    सीवर लाइन, अमृत 2.0, नदी और सरोवरों के जीर्णोद्धार जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट तकनीकी निर्णयों और विभागीय समन्वय की प्रतीक्षा में हैं। मुख्यमंत्री की निगरानी वाले प्रोजेक्ट और सामुदायिक भवनों से जुड़े काम भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ पा रहे हैं। नगर निगम को पार्षद, विधायक और सांसद निधि के निर्माण कार्यों की एजेंसी भी बनाया जाता है, लेकिन विभागीय अमले की कमी के कारण इन कामों की स्वीकृति, क्रियान्वयन और निगरानी पर दबाव बढ़ रहा है। इसका सीधा असर शहर के अलग-अलग इलाकों में दिखाई दे रहा है।

    Share:

  • स्कूल में दीपावली सफाई के नाम पर छात्राओं से उठवाया कचरा, बवाल

    Thu Nov 5 , 2026
    जबलपुर। शहर में एक सरकारी स्कूल शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला मामला सामने आया है! जिस उम्र में हाथों में कलम और किताबें होनी चाहिए थीं, उस उम्र में मासूम बच्चियों के हाथों में झाड़ू और कचरे के टोकरे थमा दिए गए. शासकीय कन्या शाला ब्योहारबाग में दीपावली की आड़ में छात्राओं से […]
    सम्बंधित ख़बरें
    लेटेस्ट
    खरी-खरी
    का राशिफल
    जीवनशैली
    मनोरंजन
    अभी-अभी
  • Archives

  • ©2026 Agnibaan , All Rights Reserved