
नई दिल्ली। तीन बैंकों ने सोमवार को बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) के एकल-न्यायाधीश पीठ द्वारा पिछले महीने उद्योगपति अनिल अंबानी (Industrialist Anil Ambani) को दी गई अंतरिम राहत के खिलाफ अपील दायर की। न्यायाधीश ने 2020 की फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट (FAR) के आधार पर अंबानी के खातों के खिलाफ कार्रवाई करने से ऋणदाताओं को रोका था।
हाईकोर्ट का पिछला आदेश
दिसंबर में हाईकोर्ट ने अंबानी की इस दलील से सहमति जताई थी कि FAR 2020 की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा “वाणिज्यिक बैंकों में धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन” पर जारी 2024 के मास्टर निर्देश का उल्लंघन करती है।
बैंकों की दलीलें
एक रिपोर्ट के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश श्रीचंद्रशेखर और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की पीठ के समने अपील सुनवाई में, एक बैंक की तरफ से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि जब तक आदेश पर रोक नहीं लगती, इसके “विनाशकारी” नतीजे होंगे।
मेहता ने कहा कि न्यायमूर्ति मिलिंद जाधव द्वारा दर्ज किए गए निष्कर्ष, अंबानी द्वारा दायर मुकदमे या अंतरिम राहत की उनकी याचिका की सुनवाई के दौरान अदालत में प्रस्तुत तथ्यों पर आधारित नहीं थे।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि “आरबीआई के 2024 के मास्टर परिपत्र को प्रत्यावर्ती प्रभाव दिया गया है, जो स्पष्ट रूप से अनुमेय नहीं है”। दिल्ली से ऑनलाइन पेश होते हुए मेहता ने कहा कि ऑडिट रिपोर्ट में तथ्यों पर निष्कर्ष हैं, जिसमें कहा गया है कि फंड “दुरुपयोग” किए गए और “हटा लिए गए”। उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंबानी ने कभी भी FAR को तथ्यों के आधार पर चुनौती नहीं दी।
बैंकों का कहना था कि बाहरी ऑडिटर की रिपोर्ट 2016 के RBI सर्कुलर के तहत थी, जिसका पालन किया गया था। अंबानी के वकील ने पहले तर्क दिया था कि 2024 के RBI मास्टर निर्देश अनिवार्य रूप से पहले के 2016 के निर्देशों की जगह लेते हैं और फोरेंसिक ऑडिट के लिए नियुक्त “बाहरी ऑडिटर” को कंपनी अधिनियम के तहत एक ऑडिटर होना चाहिए।
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