रायपुर। छत्तीसगढ़ में चौथी कक्षा की अंग्रेजी के पेपर (English paper) को लेकर विवाद मच गया। हाफ इयरली इग्जाम (Half-yearly exam) में एक बहुविकल्पीय प्रश्न में कुत्ते (Dog) के नाम के उत्तर के विकल्प के रूप में ‘राम’ (Ram) लिखा था। प्रश्न पत्र में पूछा गया था कि मोना के कुत्ते का नाम क्या है? उत्तर में 4 विकल्प थे- बाला, शेरू, राम और इनमें से कोई नहीं।
रायपुर मंडल के कई जिलों के सरकारी स्कूलों में पिछले साल 6 जनवरी को परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र की तस्वीरें ऑनलाइन सामने आईं और वायरल हो गईं। इस पर हिंदू संगठनों ने कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि पालतू जानवर के नाम के संदर्भ में ‘राम’ शब्द का प्रयोग धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है। पेपर का वितरण बलौदाबाजार, भाटापारा, महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिले में हुआ था।
मामला बढ़ने पर रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। समिति ने प्रश्न पत्र की तैयारी, मूल्यांकन और अंतिम मुद्रण से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया कि विवादित विकल्प छात्रों को बांटे गए प्रश्न पत्र में शामिल था।
जांच में टिल्डा के नक्ती (खपरी) स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका शिखा सोनी को प्रश्नपत्र तैयार करने वाली और रायपुर के फाफडीह स्थित एसईजीईएस उच्च माध्यमिक विद्यालय की संविदा सहायक शिक्षिका नम्रता वर्मा को परीक्षा नियंत्रक के रूप में पहचाना गया। दोनों शिक्षिकाओं ने लिखित स्पष्टीकरण और माफीनामा पेश किया।
प्रारंभिक जांच के बाद शिक्षा विभाग ने प्रश्नपत्र तैयार करने वाली प्रधानाध्यापिका को सस्पेंड कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि परीक्षा नियंत्रक शिक्षिका के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी गई है और उन्हें बर्खास्तगी का सामना करना पड़ सकता है।
अपने बयान में शिखा सोनी ने कहा कि उनका इरादा ‘रामू’ टाइप करने का था, लेकिन टाइप करते समय ‘यू’ अक्षर छूट गया, जिससे ‘राम’ प्रिंट हो गया। उन्होंने इसे अनजाने में हुई गलती बताया और माफी मांगी।
यह विवाद प्रशासनिक खींचतान में भी बदल गया। महासमुंद के डीईओ विजय लहरे ने बताया कि उनके जिले में अर्धवार्षिक परीक्षा के दौरान यह मुद्दा सामने आया और जैसे ही अधिकारियों ने “राम” के उल्लेख पर ध्यान दिया, उस विकल्प को हटा दिया गया। उन्होंने दावा किया कि उनके जिले द्वारा तैयार किया गया प्रश्नपत्र मुद्रित नहीं हुआ था।
लहरे ने प्रिंटिंग प्रेस में हुई गलती का दावा करते हुए आरोप लगाया कि प्रिंटिंग प्रेस ने किसी दूसरे सेट का प्रश्न पत्र इस्तेमाल किया था। उन्होंने कहा कि वे हिंदू और भगवान राम के भक्त हैं। उनका किसी को ठेस पहुँचाने का कोई इरादा नहीं था। रायपुर स्थित लोक शिक्षा निदेशालय (डीपीआई) ने डीईओ विजय लहरे को कारण बताओ नोटिस जारी कर इस चूक के संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है।
©2026 Agnibaan , All Rights Reserved