
भोपाल। मध्यप्रदेश (MP) के बिजली उपभोक्ताओं (Electricity consumers) के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब बिजली बिल किलोवाट के बजाय किलो-वोल्ट एम्पीयर के आधार पर तैयार किया जाएगा, जिससे उपभोक्ताओं की जेब पर 15 प्रतिशत तक का भार बढ़ सकता है। मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने बिलिंग फॉर्मूले में यह अहम बदलाव प्रस्तावित किया है, जिसे मप्र विद्युत नियामक आयोग को भेजा गया है।
इस बदलाव का सीधा असर प्रदेशभर के हजारों उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। इस नई व्यवस्था में उपभोक्ताओं से केवल वास्तविक खपत ही नहीं, बल्कि तकनीकी लॉस (अनुपयोगी बिजली) का भी शुल्क लिया जाएगा। अकेले इंदौर जिले में ही करीब 33 हजार उपभोक्ता इस दायरे में आएंगे, जिनमें बड़े संस्थान और औद्योगिक उपभोक्ता भी शामिल हैं।
कैसे बढ़ेगा बिल?
किलोवाट बिजली की वास्तविक खपत को दर्शाता है, जबकि किलो-वोल्ट एम्पीयर कुल आपूर्ति की गई बिजली को बताता है, जिसमें तकनीकी लॉस भी शामिल होता है। दरअसल घर के पुराने उपकरण, जर्जर वायरिंग के कारण पावर फैक्टर प्रभावित होता है। पावर फेक्टर 90 से 99 के बीच होना चाहिए, लेकिन खराब उपकरणों के चलते पावर फैक्टर 70 से 80 के बीच पहुंच जाता है। इससे बिजली की खपत मीटर में कम आती है, लेकिन विद्युत मंडल की ग्रिड से ज्यादा बिजली जाती है। इसे पॉवर लास कहा जाता है और उसका भार विद्युत कंपनियों को भुगतना पड़ता है, लेकिन अब यह खपत किलोवाट के बजाय एम्पीयर से आकलित होगी और उसका बिल चुकाना होगा।
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