
नई दिल्ली । भारत (India) ने गाजा पर अंतरराष्ट्रीय शांति बोर्ड (Gaza Board of Peace) के गठन को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) के निमंत्रण पर अभी कोई प्रतिक्रिया जाहिर नहीं की है। ट्रंप ने भारत समेत करीब 50 देशों को इस बोर्ड में शामिल होने के लिए न्योता दिया है। बोर्ड का मुख्य काम गाजा में होने वाली गतिविधियों की देखरेख होगा। इसकी अध्यक्षता खुद ट्रंप करने वाले हैं। खबरें हैं कि स्थाई सदस्य बने रहने के लिए तीन सालों के बाद देशों को मोटी फीस चुकानी पड़ेगी।
भारत का क्या रुख
सूत्रों ने कहा कि इस पर विचार-विमर्श किया जा रहा है तथा अगले कुछ दिनों में फैसला ले लिया जाएगा। गाजा में स्थाई शांति एवं स्थिरता के लिए ट्रंप ने एक शांति बोर्ड के गठन का ऐलान किया है जिसमें विश्व के चुनिंदा देशों एवं नेताओं को शामिल किया जा रहा। इसी कड़ी में व्हाइट हाउस ने प्रधानमंत्री मोदी को भी निमंत्रण भेजा है। एक पत्र पीएम मोदी को भेजा गया है, जिसमें कहा गया है कि मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने और वैश्विक संघर्षों के समाधान के लिए भारत को जोड़ा जाना जरूरी है।
भारत ने सोमवार को निमंत्रण प्राप्त होने के बाद त्वरित प्रतिक्रिया नहीं दी है। हिन्दुस्तान से बातचीत में सूत्रों ने कहा है कि निमंत्रण का अध्ययन किया जा रहा। अगले कुछ दिनों के भीतर इसमें शामिल होने या नहीं होने पर फैसला लिया जाएगा।
किन देशों को न्योता
भारत के अलावा इजरायल, मिस्र, तुर्की, कतर, पाकिस्तान, कनाडा और अर्जेंटीना सहित लगभग 50 देशों को आमंत्रित किया गया है। सदस्यों की आधिकारिक सूची की घोषणा आने वाले दिनों में दावोस में होने वाली विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान होने की संभावना है।
व्हाइट हाउस ने बोर्ड के विजन को लागू करने के लिए एक कार्यकारी समिति की भी घोषणा की है। इस समिति में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, जारेड कुशनर, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा और उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गेब्रियल जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
पत्र में क्या लिखा
ट्रंप ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘बोर्ड ऑफ पीस’ का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया। यह निकाय, गाजा में स्थायी शांति लाने और ‘वैश्विक संघर्ष’ के समाधान के लिए ‘‘एक साहसिक नए दृष्टिकोण’’ पर काम करेगा। ट्रंप ने मोदी को एक पत्र लिखा, जिसे भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर साझा किया।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पत्र में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को मध्य पूर्व में ‘‘शांति बहाल करने के लिए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व शानदार प्रयास’’ में शामिल होने और साथ ही ‘‘वैश्विक संघर्ष के समाधान के लिए एक साहसिक नए दृष्टिकोण’’ पर काम करने के लिए आमंत्रित करना उनके लिए बहुत सम्मान की बात है। ट्रंप ने गाजा पट्टी में इजराइल और हमास के बीच हुए युद्धविराम समझौते के दूसरे चरण के तहत इस बोर्ड का अनावरण किया।
क्या करेगा बोर्ड ऑफ पीस
इजरायल और हमास ने अक्टूबर में ट्रंप की शांति योजना पर सहमति जताई थी। ट्रंप ने कई वैश्विक नेताओं को इसी तरह के पत्र भेजे हैं। वॉशिंगटन, ट्रंप के ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को गाजा और उसके आसपास शांति एवं स्थिरता लाने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय निकाय के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि यह निकाय अन्य वैश्विक संघर्षों में भी अहम भूमिका निभा सकता है। मूल रूप से, इस नए निकाय को गाजा के पुनर्निर्माण के लिए शासन की देखरेख और वित्तपोषण समन्वय का कार्य सौंपा जाना है।
ट्रंप ने मोदी को लिखे पत्र में 29 सितंबर को गाजा संघर्ष को समाप्त करने की व्यापक योजना की घोषणा के साथ-साथ मध्य पूर्व में शांति लाने के लिए अपनी 20-सूत्री रूपरेखा का भी उल्लेख किया।
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