
वो तृणमूल नहीं हथियाना चाहते… वो तो ममता से पीछा छुड़ाना चाहते हैं… वो जानते हैं कि ममता का साथ, यानी मौत का हाथ… ममता ने सत्ता में रहते हुए कांटे नहीं, बल्कि भाले बोए हैं… ममता ने मोदी को ललकारा है… ममता ने केंद्र को फटकारा है… ममता ने भाजपाइयों को मारा है…ममता ने पुलिस को बंधुआ बनाया… सीबीआई को हडक़ाया… जब उसने ईडी तक को नहीं बख्शा तो उसे और उसके साथ रहने वालों को कौन बख्शेगा… ममता के अहंकार का तब कोई प्रतिकार नहीं था, लेकिन हार के बाद तो उसका संहार होना तय है… क्रोध भाजपा का या भाजपा की सरकार का ही नहीं है… बल्कि हर उस भाजपाई का है, जो 15 साल से शोषित, पीडि़त होकर घुटन की जिंदगी जी ही नहीं रहा, बल्कि हर दिन मरता रहा है…उसी का परिणाम है कि ममता के भतीजे को जनता ने कुत्ते की तरह पीटा और उसे गली-मोहल्लों से बचकर निकलना पड़ा… यही हाल ममता के सांसदों का हो रहा है… कोई उनकी गाड़ी फोड़ रहा है तो कोई उनके घर के शीशे तोड़ रहा है…यह उबाल और विध्वंस फैलाए उससे पहले नेता अपने आप को बचाने की हिम्मत नहीं जुटाएगा तो वो भी जनता के आतंक की कीमत चुकाएगा… यही कारण है कि ममता के लगभग सारे विधायक बगावत की हिमाकत में शामिल हैंं… और वो भी सत्ता में शामिल होने के लिए नहीं, बल्कि ममता से पीछा छुड़ाने के लिए अपना गुट बना रहे हैं और मोदीजी के साथ ही साथ भाजपा को भी संदेश भिजवा रहे हैं कि हमने ममता को मार दिया, अब आप हमें बख्श दो… यही हाल होना है अहंकार का… सत्ता में रहते हुए ममता को लगता था कि वो सर्वव्यापी, सर्वशक्तिमान और सदा सत्ता में रहने वाली है, इसीलिए उसने हर वो काम किए, जो असूर करते हैं… रावण के जेहन में बसते हैं… उसने केंद्र सरकार से लेकर चुनाव आयोग और केंद्रीय शक्तियों को ओढऩा-बिछोना बनाया…फटकारने और धोने के काम में लगाया…यहां तक कि देश की सुरक्षा को भी नकारते हुए सीमा सुरक्षा बलों को सीमाओं पर बाढ़ लगाने से रोका… उन्हें जमीन देने से रोका, जैसे वो राज्य की मुखिया नहीं देश की मलिका हो…घुसपैठियों और फर्जी वोटरों के बूते लगातार कुर्सी पर बैठने वाली ममता की सत्ता तब ही ढह गई थी, जब देश में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू हुई और घुसपैठिए देश और वोट छोडक़र भाग निकले…सत्ता जाते ही जनता के हाथ खुल गए तो नेताओं की जुबान… जनता ने ममता के नेताओं को पीटना शुरू कर दिया तो ममता के नेताओं ने पीछा छुड़ाना…कोई ममता पर तानाशाही का इल्जाम लगा रहा है तो कोई ममता को अभिषेक की कठपुतली बता रहा… पर हर किसी को केवल इस बात का डर सता रहा है कि ममता को नहीं छोड़ेंगे तो इस कदर पिटेंगे कि कुर्सी पर भी कांटे नजर आएंगे… विधायक हो या सांसद… विधानसभा और संसद के बजाय जेलों में नजर आएंगे… ममता को छोड़ देंगे तो शायद कोप से बच पाएंगे… महाराष्ट्र में शिंदे ने तो सत्ता के लिए शिवसेना को तोड़ा-झंझोड़ा, लेकिन पश्चिम बंगाल में तो नेता भाजपा के हाथ जोडऩे के लिए ममता को छोडऩे में लगे हुए हैं…
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