
वॉशिंगटन। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (US Supreme Court) के ऐतिहासिक फैसले के तीन दिन बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाते हुए इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ की वसूली पूरी तरह रोकने का निर्देश दिया है।
20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ऐतिहासिक फैसला सुनाया कि अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की शक्ति नहीं देता। इस फैसले ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को पूरी तरह अवैध करार दिया। अब अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा एजेंसी ने सोमवार को अपने कार्गो सिस्टम मैसेजिंग सर्विस पर शिपर्स को सूचित किया कि वह मंगलवार को पूर्वी मानक समय के अनुसार रात 12:01 बजे (0501 जीएमटी) से आईईईपीए के तहत लगाए गए सभी टैरिफ कोड को निष्क्रिय कर देगी और इनकी वसूली रोक देगी।
संदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस रोक का ट्रंप द्वारा लगाए गए अन्य टैरिफ पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, जिसमें धारा 232 राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और धारा 301 अनुचित व्यापार व्यवहार कानून के तहत लगाए गए टैरिफ शामिल हैं। एजेंसी ने कहा कि वह आवश्यकतानुसार सीएसएमएस संदेशों के माध्यम से व्यापार समुदाय को अतिरिक्त मार्गदर्शन प्रदान करेगी। दरअसल, कोर्ट के फैसले के तुरंत बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रतिक्रिया में एक अलग कानूनी प्रावधान (धारा 122, ट्रेड एक्ट 1974) के तहत नया 15% वैश्विक टैरिफ लगाया, जो मंगलवार से प्रभावी होगा, हालांकि यह अधिकतम 150 दिनों तक सीमित हो सकता है।
गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ‘बेहद निराशाजनक’ बताया था और कहा था कि उनके पहले के टैरिफ के खिलाफ मतदान करने वाले न्यायाधीशों को शर्म आनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत शुल्क ‘समायोजन प्रक्रिया की शुरुआत’ है और अदालत द्वारा रद्द किये गये टैरिफ के स्थान पर वैकल्पिक उपायों का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े टैरिफ (धारा 232) और व्यापार उपचार उपाय (धारा 301) पहले की तरह लागू रहेंगे। प्रशासन ने धारा 301 के तहत कथित ‘अनुचित व्यापार प्रथाओं’ को लेकर नई जांच भी शुरू की है, जिसके परिणामस्वरूप आगे और शुल्क लगाये जा सकते हैं।
इस दौरान ट्रंप ने अपने पहले के टैरिफ उपायों को अमेरिकी राजस्व बढ़ाने और शेयर बाजार को समर्थन देने वाला बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि अदालत ने विदेशी हितों का पक्ष लिया है। उन्होंने पुष्टि की कि भारत सहित विभिन्न देशों के साथ हुए हालिया द्विपक्षीय समझौते और पारस्परिक टैरिफ समायोजन नई कानूनी व्यवस्था के तहत जारी रहेंगे।
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