
डेस्क: इजरायल के लिए हमास, हिज़्बुल्ला और ईरान के खिलाफ जंग में ढाल बने आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम अब भारत को भी मिल सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को इजरायल की यात्रा पर जा रहे हैं. इस दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई अरब डॉलर की रक्षा डील पर मुहर लग सकती है. इन समझौतों में मिसाइल, एआई तकनीक, ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हो सकते हैं.
इसी बीच इजरायल ने भारत को आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम की तकनीक ट्रांसफर करने का बड़ा प्रस्ताव दिया है. यही सिस्टम है जिसका इस्तेमाल इजरायल ने हमास, हिज़्बुल्ला, ईरान और यमन के हूतियों के खिलाफ जंग में सफलतापूर्वक किया है. आयरन डोम की सफलता दर करीब 90 फीसदी बताई जाती है. यह रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन हमलों के खिलाफ काफी असरदार है. चीन और पाकिस्तान के बढ़ते खतरे के बीच यह सिस्टम भारत के लिए मजबूत सुरक्षा कवच बन सकता है.
भारत में इजरायल के महावाणिज्यदूत यानिव रेवाच ने एक इंटरव्यू में कहा कि इजरायल भारत के साथ अपने रक्षा समझौते को और मजबूत करना चाहता है. उनका कहना है कि इजरायल अपनी तकनीक भारत के साथ साझा करना चाहता है और भारत में सैन्य उपकरणों का निर्माण भी करना चाहता है. रेवाच ने कहा, ‘हम बहुत उत्साहित हैं कि प्रधानमंत्री मोदी इस हफ्ते इजरायल आ रहे हैं. भारत आज एक ग्लोबल सुपरपावर के रूप में उभर रहा है. इस दौरे के लिए कैबिनेट प्रस्ताव भी तैयार है, जिसमें राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा मुद्दों पर ध्यान दिया जाएगा.’
महावाणिज्यदूत ने कहा कि इजरायल इस क्षेत्र की संवेदनशील स्थिति को समझता है. उन्होंने बताया कि इजरायल भारत, अब्राहम अकॉर्ड्स के देशों, कुछ अफ्रीकी देशों और मिडिल ईस्ट के देशों जैसे साइप्रस और ग्रीस के साथ मिलकर एक नया सहयोग समूह बनाने की कोशिश कर रहा है. इसका मकसद कट्टरपंथी ताकतों से निपटना है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा इस पहल को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है.
रेवाच ने कहा कि भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग लगातार बढ़ रहा है. दोनों देश समान चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि इस दौरे के दौरान भारत में निर्माण, रक्षा सहयोग और आयरन डोम जैसे सिस्टम में साझेदारी पर खास ध्यान दिया जाएगा. उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा के साथ-साथ आर्थिक और राजनीतिक सहयोग भी उतना ही जरूरी है. इजरायल संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की जरूरतों को भी समझता है.
आयरन डोम एक मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम है. इसे इजरायल की कंपनी राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम और इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज ने मिलकर बनाया है. यह कम दूरी के रॉकेट, मिसाइल और ड्रोन को रोकने के लिए बनाया गया है ताकि आबादी वाले इलाकों को बचाया जा सके. यह सिस्टम रडार की मदद से दुश्मन की पहचान करता है. खतरा सही पाए जाने पर यह तमीर इंटरसेप्टर मिसाइल दागता है और हमले को हवा में ही नष्ट कर देता है.
आयरन डोम की एक बैटरी में एक रडार, एक कंट्रोल सेंटर और एक लॉन्चर होता है. एक लॉन्चर में कम से कम 20 तमीर इंटरसेप्टर मिसाइलें होती हैं. यह सिस्टम हर हमले की दिशा और लक्ष्य का आकलन करता है. अगर हमला खाली इलाके में जा रहा हो तो उसे नजरअंदाज भी कर देता है. यह कम ऊंचाई से आने वाले रॉकेट, मोर्टार और गोले के खिलाफ काफी प्रभावी है. इजरायल अब तक गाजा और लेबनान से आने वाले हजारों रॉकेट को मार गिरा चुका है.
हालांकि आयरन डोम काफी प्रभावी है, लेकिन यह महंगा भी है. एक तमीर इंटरसेप्टर मिसाइल की कीमत करीब 40 से 50 हजार डॉलर है. वहीं एक आयरन डोम बैटरी की कीमत करीब 10 करोड़ डॉलर तक हो सकती है. ऐसे में भारत को इसे खरीदने से पहले सभी पहलुओं पर विचार करना होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को सस्ते विकल्प जैसे आयरन बीम पर भी ध्यान देना चाहिए, जो एक लेजर आधारित हथियार प्रणाली है.
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