
नई दिल्ली। पाकिस्तान (Pakistan) अधिकृत कश्मीर (PoK) में 15 जुलाई को प्रस्तावित बड़े विरोध प्रदर्शन (Protest Demonstration) और लॉन्ग मार्च से पहले सुरक्षा तैयारियां (Security arrangements) तेज हो गई हैं। स्थानीय प्रशासन ने संभावित अशांति को नियंत्रित करने के लिए पाकिस्तान सरकार (Pakistan Government) से अतिरिक्त सुरक्षा बलों की मांग की है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, एक गोपनीय आधिकारिक दस्तावेज में PoK के गृह विभाग ने इस्लामाबाद से 4,000 अतिरिक्त जवानों और पाकिस्तान रेंजर्स की सात विंग्स की तत्काल तैनाती की मांग की है। यह मांग संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के आंदोलन और हालिया विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम JAAC के प्रमुख नेता शौकत नवाज मीर समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के बाद बढ़े जन आक्रोश को देखते हुए उठाया गया है।
गोपनीय पत्र में बताई गई सुरक्षा जरूरत
8 जुलाई को पाकिस्तान के गृह मंत्रालय के सचिव को भेजे गए पत्र को बेहद संवेदनशील बताते हुए उस पर “अति आवश्यक” और “गोपनीय” लिखा गया है। दस्तावेज में कहा गया है कि JAAC द्वारा आयोजित किए जा रहे लंबे मार्च, विरोध प्रदर्शन और धरनों के कारण क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति गंभीर हो गई है। प्रशासन का दावा है कि मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था इस स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है, इसलिए अतिरिक्त बलों की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
आधे जवान हथियारों से लैस, आधे को मिलेगा दंगा-रोधी सामान
दस्तावेज के अनुसार, मांगी गई अतिरिक्त फोर्स PoK में पहले से तैनात सुरक्षा बलों के अतिरिक्त होगी। प्रशासन ने कहा है कि इन जवानों की तैनाती प्रदर्शन के खतरे को नियंत्रित करने, प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने और मौजूदा सुरक्षा बलों की सहायता के लिए जरूरी है।
मांग के अनुसार, आने वाले सुरक्षा कर्मियों में 50 प्रतिशत जवान आधुनिक हथियारों और पर्याप्त गोला-बारूद से लैस होंगे, जबकि बाकी 50 प्रतिशत को दंगा-रोधी उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि यदि दंगा-रोधी सामान की कमी हो तो तैनाती से पहले पाकिस्तान के केंद्रीय स्टॉक से इसकी पूर्ति की जाए।
JAAC पर हिंसा फैलाने का आरोप
PoK प्रशासन ने मौजूदा तनाव के लिए संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी को जिम्मेदार ठहराया है। प्रशासन का आरोप है कि पुंछ और रावलकोट में लगातार धरने दिए जा रहे हैं और आसपास के जिलों में रैलियां कर लोगों को आंदोलन से जोड़ा जा रहा है।
प्रशासन ने यह भी दावा किया है कि प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े सशस्त्र लोग मुजफ्फराबाद और मीरपुर डिवीजनों में माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों पर सुरक्षा बलों और आम नागरिकों को निशाना बनाने तथा खाद्य सामग्री ले जा रहे ट्रकों को आग लगाने के आरोप लगाए गए हैं। प्रशासन का दावा है कि हिंसा में अब तक चार सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई है और 174 अन्य घायल हुए हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
15 जुलाई से पहले बढ़ी चिंता
बड़े मार्च से पहले इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की मांग ने क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने आशंका जताई है कि भारी सुरक्षा तैनाती के बाद इलाके में सख्त कार्रवाई हो सकती है।
वहीं, JAAC पिछले कुछ समय में PoK में स्थानीय मुद्दों को लेकर जनता की आवाज उठाने वाले प्रमुख संगठनों में शामिल हो गया है। समिति का कहना है कि बिजली की महंगी दरों, आटे की कमी और बुनियादी अधिकारों जैसे मुद्दों पर पाकिस्तान सरकार और स्थानीय प्रशासन पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं। संगठन का आरोप है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया जा रहा है।
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